कसत चली आगी लागै का पता

आगी करिस घर से बेघर। या महीना सैकड़न लोगन के घरन अउर खलिहान मा आगी लाग गे हवै पूर गृहस्थी अउर खलिहान मा आगी लागै से आनाज जल के राख होइगा हवै।
या बात सोचै वाली हवै कि मड़ई खेत मा काटत रहत हवै घर अउर खलिहान मा आगी लाग जात हवै। मड़ई का घर जलब अउर खलिहान का गल्ला जलब देखत हवै जबै दउड़ के आवत हवै। उनके मूह से यहै निकरत हवै कि हमका पता नहीं आय कि कसत आगी लाग गे हवै। जउन कि या बात सोचै वाली हवै उनका भी या बात का पता लगावैं का चाही कि आगी कसत लाग हवै।
गांव देहात मा मड़ई महुवा के पत्ता अउर घूर जलावैं खातिर आगी लगा देत हवै। मड़इन का वा आगी कउनौ मायने नहीं राखत आय? मडई तौ सरकार के मुआवजा दे के इंतजार मा बइठ जात हवै। या बात कहे नहीं सोचत कि घूर से सुलग के आगी लाग सकत हवै।
सरकार भी या मामला मा जांच करवावत हवै अउर मुआवजा दे का भरोसा देत हवै। मुआवजा भी मिला तौ नुकसान के न के बराबर मिलत हवै। यहै से कइयौ परिवार भूखे के कगार मा हवै। या कारन कइयौ मड़ई आत्महत्या करैं का मजबूर होत हवै। इनतान के मामला मा सरकार का अउर जिला के अधिकारिन का ठोस कदम उठावंै का चाही।