कर्णाटक चुनाव नतीजों ने लिया नया मोड़

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

कर्नाटक में 15 मई को घोषित हुए चुनाव परिणामों के बाद किसी भी दल को बहुमत नहीं प्राप्त हुआ था। लेकिन येदुरप्पा ने राज्यपाल के न्योते के बाद शपथ ग्रहण किया तो कांग्रेस ने इसका विरोध किया और मामला सुप्रीम कोर्ट जा पहुंचा।

सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत साबित करने के लिए 28 घंटे का समय दिया लेकिन फ्लोर टेस्ट से कुछ मिनटों पहले ही येदुरप्पा ने इस्तीफा दे दिया था।

बीजेपी के बहुमत साबित करने से पहले ही कांग्रेस ने अचानक एक के बाद एक कई फोन रिकॉर्डिंग्स सार्वजनिक कर दी जिसमें ये आरोप था कि बीजेपी नेताओं और येदुरप्पा ने कांग्रेस विधायकों को पैसे और पद का लालच देकर खरीदने की कोशिश की है।

कथित रुप से जनार्दन रेड्डी और कांग्रेस विधायक की बातचीत का ऑडियो भी कांग्रेस ने जारी किया जबकि बीजेपी इन आरोपों को खारिज करती रही।

कांग्रेस पार्टी के सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि बीजेपी और उनके करीबियों की बातचीत रिकॉर्ड करने का प्लान तीन दिन पहले ही बन चुका था जब एक मध्यस्थ ने पार्टी के सीनियर नेताओं से संपर्क किया। उस मध्यस्थ ने बताया कि उसे बीजेपी के लिए विधायकों का इंतजाम करने का जिम्मा सौंपा गया है और वरिष्ठ पार्टी नेता विधायकों से डील की बात सीधे करेंगे।इसके बाद पार्टी नेताओं ने ये तय किया कि बीजेपी नेताओं को ट्रैप करने के लिए सौदेबाजी का ड्रामा किया जायेगा।

इसके बाद कुछ ऐसे विधायकों को इस काम पर लगाया गया जिन पर बीजेपी को शक ना हो कि उन्हें ट्रैप किया जा रहा है। इसके लिए हिरकेरूर विधायक बीसी पाटिल को आगे किया गया कि वो बीजेपी नेताओं के साथ इस डील की एक्टिंग करें क्योंकि बीसी पाटिल ने कन्नड़ फिल्मों में काम किया है और इसमें पारंगत हैं। विधायकों के समर्थन करने और बीजेपी को वोट देने के लिए कुछ और विधायकों का नाम बताने का प्लान बनाया गया।

कांग्रेस का दावा है कि जब पाटिल बस में थे, उसी वक्त कई बीजेपी नेताओं के फोन रहे थे। इनकी रिकॉर्डिंग की गई जिसमें एक कॉल येदुरप्पा की भी बताई जा रही है। जबकि दूसरी श्रीरामुलु और राव के साथ। इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस नेताओं की सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाले डीके शिवकुमार का दावा है कि करीब 40 विधायकों को बीजेपी ने कॉल किया था। शिवकुमार ने कहा कि गुलाम नबी आजाद ने सभी को निर्देश दिया था कि जब कॉल आये तो उसकी रिकॉर्डिंग की जाए। इसके बाद हमनें उनकी पोल खोल दी।

हालांकि बीजेपी ने इन आरोपों को खारिज का दिया और केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ये एक डर्टी ट्रिक है और ये सब रिकॉर्डिंग्स फेक है।