कभे होहे समस्या दूर?

शिक्षा की कमी होंय के कारन गरीबन को  चारो केती शोषण करो जात हे। चाहे अस्पताल में हो जा फिर अन्य विभाग। अगर आदमी खा आपन जमीन नपाउने हे तो पेहले लेखपाल खा रुपइया देने परत हे। नई तो आदेश होंय के बाद भी किसान लेखपाल के चक्कर काटत रहत हे। दूसर बात जा हे कि सरकारी अस्पतालन में  डाक्टर कभऊं समय से नईं आउत हे। आदमी सरकारी सुविधा ओर अच्छो इलाज करवायें के लाने सुबेरे से लाइन लगा लेत हे। सरकारी सुविधा के नाम के लाने एक रुपइया पर्चा तो बना देत हे जीसे मारीज पर्चा लये डक्टर के इन्तजर में बेठे रहत हे। भीड़ ज्यादा होंय पे डाक्टर जल्दी से मारीज की परेशानी पूंछ के दवाई बाहर से लिखी जात हें। जीसे दो सौ से पांच सौ रुपइया तक की दवाई आउत हे। डाक्टर खुद को अस्पताल खोले रहत हें ओर मारीजन खा अपने अस्पताल में बुला के इलाज करत हें। जभे की सरकार जिला अस्पताल में ज्यादा से ज्यादा दवाई इन्जेक्सन ओर हर तरह के डाक्टरन की पोस्टींग होत हे, फिर भी अस्पतालन से एक्सीडेंण्ट या आपरेशन केस एक से दूरे अस्पताल में रेफर कर दये जात हे। जीसे रास्ता में व्यक्ति की मोत हो जात हे। ईखो जिम्मेंदार कोन? सवाल जा उठत हे की कभे तक जा समस्या चलहे। सरकार खा ई सब बातन खा बोहतई गम्भींरता से लेय खा खही तभई जा समस्या दूर हो सकत हे।