कभी लाज और कभी दबंगई के कारण दलित महिलाएं आगे नहीं आ पाती, फैजाबाद में इस मुद्दे पर कानूनी प्रशिक्षण

हमारे समाज में आज भी दलितों को कुदृष्टि से देखा जाता है। सदियों पहले जिस बंधनों और कुरीतियों को पीछे छोड़ हम आगे बढ़ रहे हैं वहीँ दलितों के प्रति लोगों की सोच को हम आज भी नहीं बदल पाए हैं।
हमारे समाज का सबसे दबा-छुपा तबका महिलाओं का है और उनमें भी दलित महिलाओं का। ऐसे में उनके साथ होने वाले अन्यायपूर्ण व्यवहार और अपराधों को कैसे न्याय दिलाया जाये और कैसे महिलाओं को सबल बनाया जाये, इसी विषय पर फैजाबाद में विशाखा फाउंडेशन और आल इंडिया दलित महिला अधिकार मंच ने मिल कर एक दिवसीय क़ानूनी प्रशिक्षण दिया।
विशाखा फाउंडेशन से जुड़ी अयोध्या, जिला फैजाबाद की मालती का कहना है कि हम हर रोज खबरें सुना और पढ़ा करते हैं कि दलित महिला के साथ अपराध हुआ, बलात्कार, हत्या आदि हुआ लेकिन कभी यह नहीं सुनते कि किसी दलित महिला को न्याय मिला।
उन्होंने आगे कहा, इसकी वजह यह है कि दलित महिलाओं को क़ानूनी कोई जानकारी ही नहीं है और जिन्हें जानकारी है वह भय के कारण सामने नहीं आना चाहती। यह एक दिवसीय कार्यक्रम इसी सम्बंध में आयोजित किया गया है। ताकि हम महिलाओं को उनके क़ानूनी हक और अधिकारों से अवगत कराएँ। साथ ही उनके साथ होने वाले अपराधों के खिलाफ उनकी आवाज़ को बुलंद करना सिखाएं।
आल इंडिया दलित महिला की अध्यक्ष सोना स्मृति का कहना है, दलित महिलाओं के दर्द को समझने के लिए हमें जमीनी रूप से काम करने की जरूरत हैं। ऐसा नहीं है कि सरकार और कानून में दलितों के लिए कानून नहीं है। लेकिन इनके लागू होने और उस पर उचित कार्यवाही न होने के कारण दलितों का हक मारा जाता है।
उन्होंने आगे कहा, हम चाहते हैं कि दलित महिलाओं के लिए जो सेवाएं और कानून हमारे विधान में है उसे सरकार निष्पक्ष हो कर, पारदर्शी तरीके से और निष्ठा के साथ दलितों को दे, तभी दलितों का समाज में एक बेहतर स्थान बन सकता है।

रिपोर्टर- संगीता

17/02/2017 को प्रकाशित