कत्तौ खत्म होइ सकत हवै डकैतन का दहशत

पुलिस बस जंगलन मा डकैतन का ढूढत रही जई।

बुन्देलखण्ड क्षेत्र का नाम सुन के मड़ई डेरा जात हवै कि कहां के नाम लई लीन गा हवै। या क्षेत्र तौ डकैतन से भरा हवै। या कारन मड़ई जल्दी इ इलाकन मा नौकरी भी करै का डेरात हवै।कहे का तौ ददुवा, ठोकिया अउर बलखड़िया जइसे डकैतन का आतंक खतम होइ गा। पै शायद उनसे ज्यादा तौ अब मड़इन के मन डेर बना रहत हवै। पुलिस प्रसाशन भी परेशान होइ के बइठ जात हवै।  चित्रकूट जिला मा या समय हर रोज मड़ई डकैतन के आतंक से परेशान हवै। पै सरकार या मामला मा कउनौ कदम काहे नहीं उठावत आय। तीन लोग का अपहरण कई के बेरहमी से पेड़ मा बांध के जिंदा जला दिहिन। पै पुलिस कुछौ नहीं कई पाई। आज भी ललित अउर गौप्पा जइसे डकैत जनता का परेशान करै मा लाग हवै। पुलिस बस या कही के टाल मटोल करत हवै कि वा मध्य प्रदेश का मामला आय तौ हुंवा के पुलिस कुछ कइ सकत हवैं। यहै कारन डकैत फेर एक मास्टर का अपहरण कइ लिहिन या कारन गांव के मड़ई गांव छोड़े का मजबूर हवै। पुलिस प्रशासन आखिर का चाहत हवै? काहे नहीं इनतान के केस मा सरकार से मदद मांगत हवै? सरकार का इ घटना के बारे मा नहीं पता चला आय का? कब तक गरीब जनता डकैतन के डेर से घुट-घुट के मरत रही? घर से बाहर कसत मड़ई जिन्दगी बिताई? इनके बच्चन के भविष्य का का होइ? पुलिस प्रशासन अउर सरकार के लगें  उंई परिवार के खातिर कउनौ जवाब हवै जेहिकर लड़कन का जिंदा जला के मार दीन गा अउर आज भी उनके परिवार का  जान से मारै के धमकी दीन जात हवै। मड़इन का कहब हवै कि येत्ता आतंक तौ ददुवा भी नहीं  करत रहै ज्यादा अब हम परेशान हन कत्तौ चित्रकूट से डकैतन का दहसत खतम करवाई कउनौ या यहिनतान नये-नये डकैत पैदा होत रहि हैं।