कउनौ खुश तौ कउनौ दुखी

15 अक्टूबर का पूरे प्रदेश मा टी ई टी के परीक्षा दे बालेन के हलचल देखै का मिली हवै। यहै हलचल बुन्देलखण्ड के चित्रकूट जिला मा भी देखान। टी ई टी के परीक्षा दुइ बैच मा भे रहै।पहिले बैच मा प्राइमरी स्कूलन के जुड़े बी टी सी वालेन अउर शिक्षा मित्र के परीक्षा भे रहै।दूसरे बैच मा जूनियर स्कूलन खातिर बीएड वालेन के परीक्षा भे हवै।चित्रकूट जिला मा कुल पांच हजार एक सौ छाछठ मड़ई परीक्षा दिहिस हवैं। जबै कि छह हजार चार सौ इकत्तर मड़इन का परीक्षा दे का रहै पै जउन कत्तौ पढ़ाई नहीं करिस वा परीक्षा कसत दइ सकत हवै?सरकार तौ नये नये नियम बनावत हवै पै या नहीं देखत कि मड़इन के क्षमता हवै कि नहीं? यहै डेर के कारन तेरह सौ पांच मड़ई परीक्षा नहीं दिहिन आहीं?उनकर तौ मेहनत सब बेकार मागे? सरकार पहिले कहिस कि शिक्षा मित्रन का परीक्षा के पहिले पढ़ाई खातिर कैम्प लगाये जइहैं पै सोचै वाली बात या हवै कि जउन दस साल नहीं पूर भा वा काम एक हफ्ता मा कसत पुर होइ सकत हवै?
चित्रकूट के कइयौ परीक्षा दे वालेन का कहब रहै कि शिक्षा मित्र तौ पहिले से रुपिया प्रशासन का दइ दिहिस हवै तौ हमार पचन का पास होब मुश्किल हवै?सरकार अगर गलत काम करी तौ मड़इन के समस्या का कउन हल करी?मड़ई कसत कहत हवैं कि प्रशासन का रुपिया दीना गा हवै परीक्षा मा पास होय खातिर?का सरकार का य्हिकेबारे मा पता नहीं आये का यहिके बारे मा पता नहीं आय?