कईसे सुलझायल जतई मामला?

फोटो साभार: आफताब आलम सिद्दीकी)
(फोटो साभार: आफताब आलम सिद्दीकी)

हर मुद्दा कोट में न जाये एई के लेल प्रत्येक पंचायत में ग्राम कचहरी लगई छई। ताकि पंचायत के मामला पंचायत मे ही सुलझायल जाए। लेकिन न्याय मित्र न रहे के कारण मामला सुलझावे मे परेशानी उत्पन्न होई छई। इ समस्या पुरे बिहार में हई। जईमें सीतामढ़ी जिला डुमरा प्रखण्ड के सीमरा गांव में ग्राम कचहरी रहला के बादो सुनैना देवी के जमीनी विवाद के मामला डेढ़ साल से चल रहल हई। लेकिन उनका आई तक न्याय न मिललई। इ एगो अइसन अदालत हई, जहां गांव घर के मुद्दा के सुलझायल जाई छई। जेइमें एगों कचहरी सचिव, पंच, सरपंच अउर न्याय मित्र  (वकील) के बीच मामला रखल जाइत रहलई। पिछला मुखिया चुनाव में न्याय मित्र के बहाली भेल रहई। कुछ दिन बाद उनकर पद हटा देल गेलई। तबसे ग्राम कचहरी मे न्याय मित्र न छथिन। जब न्याय मित्र न हई त कचहरी के कानून के बारे में जानकारी के देतई या निर्णय के लेतई। कचहरी में उनका अलावा दोसरा केकरो पास कानून के जानकारी न हई। पांच साल बाद ही ग्राम कचहरी सदस्य के बदलल जाई छई। जेईमें सब के पद दोबरा मिललई लेकिन न्याय मित्र दोबरा न बहाल भेलथिन। जे पंचायत के वकील छथिन उ फेर से अपन न्यूक्ति के लेल राह देख रहल छथिन। लेकिन न्यूक्त कहां हो रहल हई। सरकार के इ कइसन नियम हई कि काम देला के तुरंत बाद काम छिन लेवे के। जे वकील लाखो रूपइया खर्च कके वकालत के पढ़ाई कैले छथिन। जे दुनिया के न्याय देई छथिन उनके साथ एतना अन्याय हो रहल हई।