ऐसे में कैसे खत्म होगा कुपोषण?

जिला सीतामढ़ी के बथनाहा की चकवा गांव के मुशहरी टोले  की आंगनवाड़ी ने बताया कि यहां पर बारह अति कुपोषित बच्चे हैं, जिनकी उम्र डेढ़ से दो साल तक है। वो न तो ठीक से चल पाते हैं और न ही बोल पाते हैं। यहां की मंजू देवी का कहना है कि मेरी पोती शमी दो साल की हो गई लेकिन बोलना तो दूर वह ठीक से खड़ी भी नहीं हो सकती। ए.एन.एम., आशा और सेविका से इलाज के लिए पूछो तो वह कुछ जानकारी नहीं देतीं। रीगा प्रखण्ड के मेंहदी नगर गांव में आंगनवाड़ी केन्द्र नहीं खुला है। यहां पर आंगनवाड़ी सेविका की बहाली को लेकर विवाद हो गया था। गांव की आशा कुमारी और सुन्दरकला देवी का कहना है कि यहां पर कुपोषित, अतिकुपोषित, गर्भवती मां और धातृ मां को पोषाहार नहीं मिलता बस पोलियो और दूसरे टीकाकरण ज़रूर होते हैं।
जिला शिवहर के तरियानी प्रखण्ड, गांव सरवरपुर, वार्ड नम्बर एक की किशोरी ललिता और मुन्नी कुमारी का कहना है कि हम लोगों को न पोषाहार मिल रहा है और न ही टीका लगाया जाता है। सेविका उर्मिला प्रसाद ने बताया कि कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों को पोषाहार देने का हमारा लक्ष्य होता है जब यह पूरा हो जाता तो बाकियों को देने की हमारी जि़म्मेदारी नहीं होती। हम लोगों को टीकाकरण के लिए प्रोत्साहित तो कर सकते हैं लेकिन ज़बरदस्ती नहीं।