ऐतिहासिक फैसला – देश में ट्रांसजेंडर को मान्यता

17-04-14 Desh Videsh - Transgenderनई दिल्ली। अब मर्द और पुरुष समाज में केवल दो जेंडरों के अलावा एक अलग जेंडर को भी सुप्रीम कोर्ट ने 16 अप्रैल को कानूनी मान्यता दे दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किन्नर इस देश के नागरिक हैं और उन्हें भी शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक बराबरी का हक है।
नागरिक अधिकारों के लिए काम करने वाली संस्था ‘लौयर्स कलेक्टिव’ की डिप्यूटी डायरेक्टर एडवोकेट तृप्ति ने बाताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला अब समलैंगिकों यानि एक जैसे जेंडर वाले लोग जो साथ में रहना चाहते उनके लिए भी उम्मीद बंधती है। उन्होंने यह भी कहा कि फैसले में साफ कहा गया है कि कोई भी जेंडर की अपनी समझ के आधार पर भेदभाव नागरिक अधिकारों को छीनने जैसा है। अब इन लोगों को किसी भी तरह से कागजी तौर पर यह साबित नहीं करना पड़ेगा कि वह लोग ट्रांसजेंडर या तीसरे जेंडर के लोग हैं।
अपने को पुरुष और महिला – दोनों खांचों से खुद को बहार रखने वाली सुचि कुशवाह ने बताया कि इस फैसले से उन्हें एक ठोस पहचान मिली है। हालांकि सामाजिक नज़रिए में बदलाव आने में समय लगेगा पर अब उनके पास अधिकार हैं जो पहले नहीं थे। सुचि राजस्थान के जोधपुर की निवासी हैं। इस समय वह दिल्ली में एक कंपनी के साथ काम कर रही हैं।

 

फैसले पर एक नज़र

ऐसे लोग जो न आदमी हैं न औरत – इन दोनों ही से अलग किसी तीसरे जेंडर में आते हैं। इन्हें समाज में किन्नर या हिजड़ा के रूप में भी जाना जाता है। इसके अलावा समाज में ऐसे भी लोग हैं। जो पैदा तो किसी स्थापित जेंडर, यानि महिला या पुरुष की पहचान के साथ होते हैं, लेकिन उन्हें अपनी इस पहचान से इनकार होता है, जैसे किसी लड़की को लड़के जैसा महसूस होता है। किसी लड़के को लड़की जैसा महसूस हो सकता है। वह रहना भी अपनी समझ वाली पहचान के साथ ही चाहता है। ऐसे लोगों के लिए यह फैसला उन्हें राहत देने वाला है। इतना ही नहीं अब हर निजी और सरकारी विभाग के फार्म में इस तीसरे जेंडर के लिए अलग से एक श्रेणी ज़रूरी होगी।