एचआईवी से संबंधित विधेयक को मिली लोकसभा की मंजूरी

साभार: विकिमीडिया कॉमन्स

एचआईवी एड्स पीड़ितों के इलाज, शिक्षण संस्थानों में दाखिले और रोजगार के अलावा अन्य स्थानों पर किसी भी तरह के भेदभाव की रोकथाम को सुनिश्चित करने वाले एक महत्वपूर्ण विधेयक को आज लोकसभा में पारित कर दिया गया है। राज्यसभा में इस विधेयक को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है।
स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा के प्रस्ताव पर कल उच्च सदन ने ‘इम्यून डेफिशिएंसी वायरस और एक्‍वायर्ड इम्यून डेफिशिएंसी सिंड्रोम, प्रिवेंशन और कंट्रोल’ विधेयक को सरकारी संशोधनों के साथ ऐक्लमेशन से पारित कर दिया। इससे पूर्व नड्डा ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि कानून बनाते समय इस बात को ध्यान में रखा जायेगा कि भारत में इस रोग से संक्रमित कोई भी व्यक्ति उपचार का पात्र होगा और उसके साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि भारत के सक्रिय पहल के कारण इस संक्रमण की दर विश्व की औसत गिरावट दर से कम हुई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक औसत गिरावट की दर 35 प्रतिशत है जबकि भारत में यह गिरावट दर 67 प्रतिशत है।

इस बिल की 5 खास बातें-
-एचआईवी के मरीजों को निशुल्क इलाज की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। इसका पूरा खर्चा केंद्र सरकार देगी।
-किसी भी एचआईवी, एड्स के मरीज के साथ किसी भी तरह का भेदभाव करना दंडनीय अपराध होगा।
-एड्स का पता चलते ही होते ही मरीज का तुरंत इलाज शुरू किया जाएगा।
-इलाज के दौरान, अदालती कार्यवाही और सरकारी रिकॉर्ड्स में मरीज की जानकारी गुप्‍त रखी जाएगी। अगर किसी ने मरीज की जानकारी को सार्वजनिक किया तो वो भी दंडनीय अपराध होगा।
-एचआईवी एड्स मरीजों के संपत्ति अधिकारों से लेकर हेल्थ सर्विसीज तक सभी अधिकारों को संरक्षण मिलेगा।