एक रात आँगन में …

मेरा नाम परी है। मैं आगरा में रहती हूं। मेरी शादी 9 साल की उम्र में हो गई थी। जब शादी हुई थी तो मुझे नहीं पता था कि शादी का मतलब क्या होता है। तीन साल बाद मेरा गौना हुआ। जब मैं ससुराल गई तो बहुत ही डरी हुई थी। तब तक तो शादी और गौना मुझे गुड्डे गुड़िया का खेल लगता था। खैर, किसी तरह समय गुजरा और मेरे दो बच्चे भी हो गये। पति के साथ किस तरह से पांच साल का समय गुज़र गया पर मुझे प्यार जैसा कुछ कभी नहीं मिला। ससुराल वाले भी प्यार नहीं देते थे मुझे। मेरी जिन्दगी में काफी घुटन जैसी होने लगी और माहौल भी बिगड़ गया, रोज-रोज की मार पीट, गाली गलौज और खाना न देना। मैं दिन भर बस रोती रहती थी।
तभी मेरी जिन्दगी में मेरे परिवार का ही एक सदस्य, लवली, मेरी मदद करने के लिए आगे आया और मेरा हाथ थामने की बात कही। उसकी बातें सुन कर मैं पसीने से तर हो गई और अपने कमरे में वापस भाग गई। मुझे लगा कोई सुन लेगा तो मानो मेरी तो जिन्दगी खत्म। पर वो धीरे-धीरे मेरी हर तरह से मदद करने लगा, बच्चों की जरूरतें पूरी करने लगा और वो भी परिवार की नजर से बचा कर।
धीरे-धीरे मुझे उससे प्यार जैसा हो गया। वो बहुत ही खूबसूरत भी था, जीन्स और टी शर्ट पहनता था। वो कुंवारा था और मैं कहां दो बच्चों की मां! पर हम दोनों की उम्र बराबर थी।
एक दिन मेरे परिवार वाले किसी रिश्तेदारी में शादी में चले गए और मैं घर पर अकेली थी। मैं आँगन में लेटी थी और मेरा बेटा अन्दर कमरे में। वो रोने लगा तो मैं उसे गोद में उठा कर चारपाई पर आकर बैठ गयी। तब लवली भी वहां आ गए और उन्होंने मुझे पकड़ लिया मैं भी उनके सीने से लग गई और उनको मना नहीं कर पाई। बस रात भर सिर्फ प्यार की बातें की और साथ में जिन्दगी बिताने की कसमें भी खाई। अब हम जी भर के फोन पर बातें करतें हैं। मैं ससुराल से अलग रहती हूं और अब जॉब भी करती हूं। पर हम शादी नहीं करना चाहते है, जिन्दगी को बिना शादी के मौज से गुजारना चाहते है।
मैं साड़ी पहनती हूं और लवली मुझे जीन्स में देखना चाहते हैं।