एक पटरी मा दूनौं पहिया चलब जरुरी तबहिने चलत परिवार

mmmजिला चित्रकूट, ब्लाक कर्वी, सोनेपुर अस्पताल। हिंया एन.आर.सी.विभाग मा लगभग चार साल से न्यूट्रीशियन के पद मा हवै। वहिका मरीजन के सेवा करै का सउख हवै। यहिसे वा स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी हवै। वा पीजी कीने हवै।
दीक्षा सिंह का कहब हवै कि हम लोग तीन बहन एक भाई हवैं। मोर बाप सरकारी नौकरी करत रहैं। हमरे बाप का अपने लड़किन का पढ़ावैं का सउख रहै। काहे से कि वा सोचत रहै कि मोर लड़की पढ़ लिख के मोर नाम रोशन करैं अउर सरकारी नौकरी करै। जेहिसे लड़किन का कउनौ चीज के परेशानी न होय। यहिसे मैं आपन मन पढ़ाई लिखाई मा लगायेंव। मोहिका बचपन से सउख रहै कि मैं एक डाक्टर बनिहौं अउर बीमार लोगन का इलाज कइके उनके पीड़ा का खतम करिहौं। या काम खातिर डाक्टर रेनू कहिन रहैं कि स्वास्थ्य विभाग मा नौकरी करौ। यहिसे वा मोर बहुतै सहयोग करिस अउर प्रेरणा दिहिस हवै। यहिके साथै मोहिका भी सउख रहै कि स्वास्थ्य विभाग मा जुड़िहौं अउर नौकरी करिहौं। यहिके खातिर लगन अउर मेहनत से पढ़ाई करेंव अउर आज मोर मेहनत अउर हिम्मत रंग लाइस हवै। मोर शादी का एक साल होइगे हवैं। अब मोर सहयोग मोर मनसवा अउर ससुराल वाले करत हवैं। यहिसे मोर नौकरी अउर घर दूनौं मा तालमेल बना रहत हवै। औरतन खातिर तौ घर अउर नौकरी दूनौं जरुरी रहत हवैं। समाज मा औरतन खातिर एक नियम बना हवै कि औरत चाहे जेत्ती बड़ी नौकरी करै वहिका घर मा खाना अउर गृहस्थी इं दूनौ काम करै का परत ही हवैं। का समाज मा बस औरतन खातिर इं दूनौं चीजे बनाई गे हवै। औरतन का इं बंधन से छुटकारा मिल जाये तौ सही रही सकत हवै। यहिके खातिर जरुरी हवै कि औरत अउर मनसवा दूनौ मिल के घर का काम करै तबहिने एक पटरी मा गाड़ी नींकतान से चल सकत हवै।

रिपोर्टर – तबस्सुम