एक पकड़ा गा तौ दूसर तैयार हवै

एक कइति गौप्पा डकैत पकड़ा गा तौ दूसर कइती बबली अउर लवलेश का आतंक बढ़ै लाग का चित्रकूट जिला मा कत्तौ डकैतन का अंत होइ या यहिनतान मड़इन का अपहरण या जान से  हांथ धोवत रहि हैं? एक कइति गौप्पा डकैत पकड़ा गा तौ दूसर कइती बबली अउर लवलेश का आतंक बढ़ै लाग का चित्रकूट जिला मा कत्तौ डकैतन का अंत होइ या यहिनतान मड़इन का अपहरण या जान से  हांथ धोवत रहि हैं?  उत्तर प्रदेश मा चाहे जेहिके सरकार आ जायें पै बुंदेलखंड  के चित्रकूट जइसे इलाका के बारे मा कउनौ का ध्यान नहीं देत आहीं। नेता मंत्री कहत हवैं कि हिंया डकैत नहीं आही। तौ गोप्पा, बबली, लवलेश इं सब कउन हवै काहे जनता का परेशान करत हवैं। अपहरण कइ के पचास-पचास लाख रुपिया के मांग करत हवैं?  नेता मंत्री डकैत केहिका मनात हवै। उंई लोगन के हाल देखतै बनत हवै जिनकर लड़का का अपहरण कइ लीन जात हवै या कत्तौ-कत्तौ लोगन का जिन्दा भी जला दीन जात हवै।चित्रकूट मा हर रोज कउनौ न कउनौ डकैत से जुड़ी खबर सुनै का मिलत हवै।  पै चित्रकूट के पुलिस प्रशासन काहे नहीं जागत आय।जबै दुसरे जिलन के पुलिस डकैतन का पकड़त  हवै तौ चित्रकूट के पुलिस शामिल होत हवैं। अउर कहत हवैं कि हम सब कीने हन पुलिस प्रशासन अगर चाह लें तौ चित्रकूट से डकैतन का अंत होइ सकत हवै। पै जबै तक कानून व्यवस्था मजबूर न होइ तौ पुलिस कुछ नहीं कइ सकत हवै? अउर एक के बाद एक डकैत तैयार होत रही अउर यहिनतान जनता परेशान होत रही या मामला मा पुलिस प्रशासन का मानब हवै कि डकैत बनै का कारन बेरोजगारी अउर अशिक्षा हवैं। साथै लालच के कारन डकैत बनत हवै। कुछ लोग डकैत के डेर से डकैत बनजात हवै? पै का पुलिस के लगे कउनौ रास्ता नहीं आय?जेहिसे उंई चित्रकूट से डकैतन का भय अउर खतम कई सकै।