एक के बाद एक धरना चालू हवैं

देश भर मा शिक्षा मित्रन  के प्रदर्शन के बाद बहुतै धरना प्रदर्शन होत हवै कत्तौ आंगनबाड़ी तौ कत्तौ बिजली कर्मचारी,तौ कत्तौ विकास के मुददन का लइके तौ अब जोर पकड़े हवै आशा कार्यकर्ता के धरना प्रदर्शन| या धरना प्रदर्शन बुन्देलखण्ड के हर जिलन मा चलत हवै| आशान का कहब हवै कि राज्य सरकार हो या केन्द सरकार हमार मानदेय बढ़ावै नहीं तौ हम काम ना करबै| यहै बात  का लइके सबै आशा मिलके पांच मांगन का लइके अधिकारिन का ज्ञापन सउपिन हवैं| अब देखै का हवै कि उनकर मांग सरकार पूर करी कि नहीं?
आशा कार्यकर्तन का कहब हवै गांव स्तर से लइके जिला स्तर तक डिलेवरी अउर मरीजन के इलाज खातिर हमका दउड़ भाग करै का पड़त हवै| चाहे रात हो दिन हो या बरसात हो तबंहू हमें घर दुवार छोड़ के मरीज के लगै रहै का पड़त हवै तब जा के हमका छह सौ रूपिया मिलत हवैं वहौं मा कुछ खर्चा हमें मरीजन खातिर वहिमा से करै का पड़त हवै| यहै से हम सरकार से आपन मानदेय अठारह हजार के करे हन नहीं तौ हम काम ना करबै|
सरकार सबसे ज्यादा काम करै वालेन का मारै मा लाग हवै| जउन कुर्सी अउर एसी मा बइठ के काम करत हवै उनका तौ हाई फाई वेतन दीन जात हवै|पै जउन रात दिन बराबर लइके काम करत हवै|उनहीन का पेट हर कउनौ मारै मा लाग हवै या सरकार मा तौ हमका कउनौ सुविधा नहीं देखात आय| पै हमार सुनवाई न होइ तौ हम अन्दोलन भी करबै| या समय सरकार का लइके बहुतै हलचल हवै का सरकार का इं सब समस्या नहीं समझ मा आवत हवै?स्वास्थ्य का लइके बहुतै कुछ प्रचार प्रसार करवावै मा लाग हवै| पै का यहिनतान का प्रचार-प्रसार आय?जहां मड़ई धरना प्रदर्शन करै का मजबूर हवै| आखिर सरकार का चाहत हवै?