एक अध्ययन जो सार्वजनिक शौचालयों में होने वाली लिंग हिंसा को रोकने की बात करता है

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सार्वजनिक स्थलों पर शौचालयों की हालत बदतर है, इसके उपयोग के संबंध में जुड़े लिंगआधारित हिंसा का हमारे समाज पर क्या असर पड़ता है इसके लिए मुंबई से जोड़ कर ‘लन्दन कॉलेज की यूनिवर्सिटी ने’ ‘लंदन के एक विश्वविद्यालय नेसार्वजनिक स्थलों पर मौजूदा शौचालयों में लिंग से जुड़ी हिंसाके बारे में एक अध्ययन किया। इसमें कहा गया है कि इस विषय पर रौशनी का कम होना, बुनियादी स्वच्छता का न के बराबर होना, खराब बनावट और शौचालय में बैठने आदि की सुविधा होने की बात की गयी है। साथ ही महिलाओं के साथ बढ़ते अपराधों को रोकने के लिए झुग्गीझोपड़ियां में पुलिस की उपस्थिति की बात भी की है।
अध्ययन कहता है कि यहाँ की महिलाएं उनके साथ हुए अपराध के बारे में किसी से बात नहीं करती ही पुलिस में जाती हैं। शौचालयों पर उनके साथ होने वाले यौन अत्याचारों के खिलाफ डर की वजह से नहीं बात कर पाती। झुग्गी झोपड़ियों में रहने वाले 142 परिवारों से बात करने पर यह तथ्य सामने आया हैं।
निष्कर्ष बताते हैं कि स्थलों में कम शौचालय सुविधाएं, बुनियादी सुरक्षा सुविधाओं, पानी और बिजली की कमी देखी गयी है। इसको खत्म करने या रोकने के लिए सभी तथ्यों पर गौर करना आवश्यक है।