ऊर्वशी बुटालिया

साभार: विकिपीडिया

• 1952 में जन्मी उर्वशी बुटालिया भारत की पहली नारीवादी प्रकाशन की संस्थापक हैं, जो उन्होंने ऋतू मेनन के साथ मिल कर खोला था, इसका नाम काली फॉर विमेन था।फिर उन्होंने जुबान बुक्सनामक प्रकाशन स्थापितकिया और अब उसे चलाती हैं।
• वह लंबे समय से महिला अधिकारों के लिए संघर्षरत हैं। निर्भया कांड के बाद 2013 में इन्होंने महिला हिंसा और सुरक्षा को लेकर विभिन्न मंचों से सख्त तेवर दिखाए हैं।
• यही नहीं उन्होंने सरकारी नीतियों की आलोचना की और महिलाओं के लिए नए क्राइसिस सेंटर समेत हेल्पलाइनों की स्थापना पर खास जोर दिया।
• 2011 में उन्हें पदम् श्री पुरस्कार भी दिया गया जो उन्होंने अपनी साथी महिला ऋतू मेनन के साथ साँझा किया।
• इनका मानना है कि भारतीयों को अभी भी नारीवाद की अवधारणा समझना बाकी है और महिला दिवस मनाना अथवा महिला सशक्तिकरण के लिए विज्ञापन बनाना केवल जुबानी बातें हैं।