उत्तर प्रदेश स्वच्छ और स्मार्ट क्यों नहीं है?

lucknow-wwइस लेख को खबर लहरिया के पत्रकार ने लिखा है। कर्नाटक राज्य ज़रूर बहुत खुश होगा। न केवल मयसूरु को देश का सबसे साफ शहर घोषित किया गया है बल्कि दावणगेरे और बेलागावी जैसे छोटे शहर उन पहले 20 शहरों में होंगे जिन्हें स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा। इसके अलावा बेंगलुरु देश की सबसे साफ राजधानी है। स्वच्छ और स्मार्ट कर्नाटक, ये खिताब तो किसी भी राज्य के लिए अच्छा है।
मध्य प्रदेश भी अपने बारे में खुशी महसूस कर सकता है। वो भले ही कर्नाटक जितना स्वच्छ न हो मगर स्मार्ट ज़रूर है। इसके तीन शहरों को स्मार्ट सिटी सूची में रखा गया है।
मगर उत्तर प्रदेश को क्या हो गया? एक भी शहर पहले 10 स्वच्छ शहरों में नहीं है। और न ही कोई शहर पहली 20 स्मार्ट सिटी में है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का निर्वाचन क्षेत्र वाराणसी तो सबसे गंदे शहरों की गिनती में आया है। राज्य की राजधानी लखनऊ भी स्मार्ट सिटी योजना में बाहर रह गया। गाजि़याबाद भी सबसे गंदे शहरों में से है।
वाराणसी में घाट की हर सुन्दर तस्वीर के साथ यहां हर सड़क के कोने पर ऊंचे-ऊंचे कुड़े के ढेर देखे जा सकते हैं। चांदनी में चमकते ताजमहल के हर सुन्दर फोटो के साथ आगरा में उतनी ही मैली तस्वीर उसकी सड़कों की है। इस बुरे प्रदर्शन का कारण क्या है?
इसका उत्तरदायित्व राज्य सरकार, नगरपालिका, हमारे सांसदों और नागरिकों पर पड़ता है। क्या हमें इस बात की परवाह नहीं कि हम कहां और कैसे रह रहे हैं?
हम इन रैंकिंगों को अस्वीकार कर सकते हैं, जिसे सरकार को संतुष्ट करने के लिए हर साल दोहराया जाता है। मगर स्वच्छ और स्मार्ट होना हमारी इच्छा और उत्तरायित्व दोनों होना चाहिए।