उत्तर प्रदेश के तीस जिलों में प्रदूषित है पानी

पानी के मुद्दे पर काम कर चुके राजेंद्र सिंह ने बताया कि जब भूजल को लगातार इस्तेमाल किया जाता है पर उसकी भरपाई ना हो तो इससे आरसेनिक की मात्रा पानी में बढ़ जाती है। इससे अलग-अलग तरह की बीमारियां हो सकती हैं।
पानी के मुद्दे पर काम कर चुके राजेंद्र सिंह ने बताया कि जब भूजल को लगातार इस्तेमाल किया जाता है पर उसकी भरपाई ना हो तो इससे आरसेनिक की मात्रा पानी में बढ़ जाती है। इससे अलग-अलग तरह की बीमारियां हो सकती हैं।

लखनऊ। पानी में आरसेनिक नाम के ज़हर को पहले बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ ही हिस्सों में पाया जाता था पर हाल ही में ऐसा देखा गया है कि राज्य के लगभग तीस जिलों का पानी इस ज़हर से प्रदूषित हो सकता है। यह ज़हर ज़मीन के नीचे पाए जाने वाले भूजल में पाया जाता है।
विशेषज्ञों द्वारा निकाली गई एक रिपोर्ट के अनुसार बलिया, लखीमपुर खीरी, बहराइच, उन्नाव, मुरादाबाद, गोंडा, राय बरेली, बस्ती, चंदौली जैसे जिलों के भूजल में सुरक्षित मात्रा से पांच गुना ज़्यादा आरसेनिक पाया गया। फैज़ाबाद, कानपुर नगर और सीतापुर में और ज़्यादा मात्रा में भूजल प्रदूषित है। पर सबसे ज़्यादा चिंताजनक स्थिति लखनऊ, अंबेडकर नगर, बागपत, बदायूं और पीलीभीत जिलों की है जहां आरसेनिक की मात्रा खतरे के निशान के करीब पहुंच गई है।
आरसेनिक ज़हर धीरे – धीरे असर दिखाता है। 2007 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सत्तर देशों में लगभग चैदह करोड़ लोग इससे प्रभावित हैं।