इनतान के हवै हाल रैनबसेरा का

इनतान होत हवैं रैनबसेरा का

ठंडी रुकै का नाम नहीं लेत आय। या कारन मडई बहुतै परेशानी उठावत हवै। कहे खातिर तौ जिला मा दसन रैनबसेरा बने हवैं, पै नाम खातिर हवैं। जबै कि सरकार कइती से मडइन अउर आवै  जाये  वाले यात्रिन का हरतान के सुविधा मिलै का चाही, पै सब कहे का होत हवै।  चित्रकूट जिला के रैनबसेरा रामायण मेला का पचासन साल पूरन बना  हवै, पै  हुवा यात्रिन खातिर पानी बिजली के व्यवस्था तक नहीं आय मडई इनतान के ठण्डी मा बिना आगी पानी के हुंवा कसत रही सकत हवै, छतरपुर और सागर से आये कैलाश अउर सुमेर बताइन कि हम पंचे हिंया घुमै आये हन पै हिंया रुके का कउनौ ढंग का रैनबसेरा नहीं  आहीं जहां मडइ ठण्डी से बच सकें। हिंया तौ पानी पियै का नहीं आय तौ कसत का रैनबसेरा हवै।
मानिकपुर मा तौ टाउन एरिया कइती से कपड़ा का रैनबसेरा बनावा गा हवै जेहिमा कउनौ बइठ भी नहीं सकत आहीं शासन प्रशासन तौ लूटै मा लाग हवै का सरकार के लगै रैनबसेरा खातिर कुछ बजट नहीं आय? या मामला मा प्रशासन से बात करै तौ उई कहत हहवैं  कि अलाव खातिर जघा- जघा लकड़ी भेउवा दीन गे हवै। पै हम का तौ कत्त्तो  लकड़ी नहीं देखान आय। कसत इनतान मडइन के साथै शासन प्रशासन खिलवाड़ करत हवै जबैकि रैनबसेरा के सुविधा खातिर लाखन रुपिया का बजट होत हवैं ;कहां हवै रैनबसेरा मा खर्च करै वाला रुपिया?