इज़रायल पर दबाव और फिलिस्तीन को मदद ज़रूरी

इज़रायल का फिलिस्तीन पर हमला जारी है, लेकिन दुनिया भर में इस मुद्दे पर चुप्पी है। 1948 में इज़रायल देश बना था, तभी से फिलिस्तीन के कुछ इलाकों पर इजरायल का कब्ज़ा है। इज़रायल का मानना है कि फिलिस्तीन पर उसका हक है क्योंकि यहूदी धर्म की शुरुआत यरूसलम में हुई थी जो कि फिलिस्तीन में है। इज़रायल में ज़्यादातर ल¨ग यहूदी धर्म मानते हैं। इज़रायल फिलिस्तीन के वजूद को खत्म कर वहां अपना अधिकार जमाना चाहता है।
इज़रायल एक शक्तिशाली देश है जिसके पास हथियारों की भरमार है। इस वजह से दुनिया के कई देश इज़रायल के साथ हैं, कई शक्तिशाली देश जैसे कि अमरीका भी। इज़रायल जब तब फिलिस्तीन पर हमले करता रहता है। अब तक हज़ारों लोग मारे जा चुके हैं। मिस्त्र सीमा से लगा हुआ है इसलिए इस बार ताज़ा हमलों को रोकने के लिए उसने युद्ध विराम कराने की कोशिश की थी, लेकिन कामयाब नहीं हुआ।
शुरुआत में भारत फिलिस्तीन के पक्ष में था। लेकिन बाद में उसने इस मामले से खुद को दूर कर लिया। दिल्ली में इज़रायली दूतावास में ताज़ा हिंसा को लेकर प्रदर्शन किए गए तो दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों को तितर बितर करने की कोशिश की है। और कुछ को गिरफ्तार भी किया। जबकि भारत समेत अन्य देशों को और ‘संयुक्त राष्ट्र’ संगठन फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश घोषित करने का प्रयास करना चाहिए। इज़रायल पर दबाव बनाना ज़रूरी है कि वह फिलिस्तीन पर हिंसा से बाज़ आए और अपना कब्ज़ा वहां से हटाए।