इंसानियत पर भारी समाजवाद

सभार : अंकित/फेसबुक

30 जनवरी को दिल्ली में अंकित सक्सेना नामक एक युवक को अलग धर्म की लड़की से प्यार करने की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। ये पूरी घटना सम्मान के लिए की गई हत्या थी, और ये घटना खुलेआम हुई। इस तरह की हिंसात्मक घटनाएं और हत्याएं अकसर ख़बरों में आती हैं, हरियाणा में खाप पंचायतों के आदेशानुसार सम्मान के नाम पर हत्याएं हर दिन होती रहती हैं, जिसका शायद हमें कभी पता चलता है, तो कभी नहीं।
अंकित हत्या के मामले की आड़ में धार्मिक नफरत फैलाने का काम भी लोगों ने किया। लेकिन अंकित के पिता ने इस हत्या को धार्मिक नफरत का रंग न देने की गुज़ारिश भी की।
प्यार पर पाबंदी लगाने वाला, धर्म के नाम पर हिंसात्मक सोच बढ़ाने वाला, ये जमाना और इसकी सोच क्या कभी बदलेगी? और इन मामलों में महिलाओं को ही अधिक सताया जाता है और सताया भी क्यों नहीं जाएगा समाज की बागडोर पितृसत्तात्मक समाज के हाथों में है। हम आपको कुछ इस ही तरह की बुंदेलखंड की घटनाएं बताते हैं, जिसका कारण कोई धर्म नहीं बल्कि दुश्मन ये जमाना और खाप पंचायत थी।
बांदा के गहबरा गांव की एक प्रेमिका की कहानी आपको सुनाते हैं, रिवाल्वर रानी की कहानी। शायद आपने भी मुख्यधार के मीडिया में ये चटपटी खबर पढ़ी होगी कि एक प्रेमिका ने शादी के मण्डप से दुल्हे का अपहरण किया बल्कि उसकी शादी रुकवाते हुए पूरे इलाके में सनसनी भी फैलाई। पर इस खबर को सनसनीखेज करने वाले सभी मीडिया से एक सवाल- आप तो समाज को सुधारने का बीड़ उठाए हुए हैं, पर ये क्या आपके अन्दर का लिंगआधारित भेदभाव कितना गहरा है कि समय-समय में बाहर निकलने को मचलने लगता है। रिवाल्वर रानी यानी वर्षा की कहानी आपकी चटपटी कहानियों से बिलकुल अलग है। साधारण-सी लड़की वर्षा अशोक यादव से प्यार करती थी। दोनों शादी करना चाहते थे पर शादी करने के लिए सबसे जरुरी शर्त कि इंसान की जात और धर्म एक होना है। पर यहां यही शर्त पूरी नहीं हुई, जिसके कारण अशोक की शादी कहीं और तय हो गई। जब वर्षा को ये बात पता चली तो वह अशोक से मिलने गई, तब अशोक की सगाई हो रही थी। वह ये देखकर घर आ गई, इसके बाद अशोक अपने घर से कहीं चला गया। इसके बाद शुरु हुआ मुख्य मीडिया का इस कहानी में नमक मिर्च लगाने का काम और बन गई चटपटी रिवाल्वर रानी की कहानी। हमारे समाज की बुरी सोच और पूर्वाग्रहों को बल देने का काम मीडिया कितना करती है, इसका उदाहरण है वर्षा की कहानी।
2016 में चित्रकूट के भौरी गेटा पुरवा गांव की घटना में एक युवती ने एक नवजात को खेत में जन्म दिया और उसे वहीं छोड़कर घर आ गई। जब नवजात के रोने की आवाज लोगों ने सुनी तो बात सामने आ गई। बच्चे को जन्म देने वाली मां अविवाहित थी इसलिए उसने समाज के डर के कारण नवजात को खेत में छोड़ दिया। बच्चा लड़की की बड़ी बहन का देवर था। उन दोनों के शारीरिक संबंध हुए, और फिर हुआ बच्चे का जन्म। इस घटना में लड़के को किसी ने कुछ नहीं कहा लेकिन हां, लड़की को बेशर्म बताया गया। गांव की रहने वाली सर्वा गुस्से में कहती हैं कि इस तरह की लड़की को तो मार देना चाहिए, क्योंकि ये लड़कियां ठीक नहीं हैं। वहीं दूसरी एक महिला कहती हैं कि इस लड़की से शादी कौन करेंगा? क्योंकि लड़की को ‘अपवित्र’ करार दिया गया है, लड़के का क्या, उसको तो आसानी से दूसरी लड़की मिल ही जाएगी। ऐसा मानना था गाँव का, और यही सामाजिक सोच भी होती है।
खैर इस कहानी में लड़के ने उस लड़की से शादी के लिए हामी भर दी थी। सब खुश थे कि बच्चे को उसके पिता का नाम मिल गया। पर किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि लड़की क्या सोचती थी, उसके मन में क्या भावनाए थी, क्या वो इस शादी के लिए रजामंद थी भी या नहीं?
वैसे भी, हमारे समाज में तो औरत की मनाही को महत्व नहीं दिया जाता, क्योंकि उसकी ना में भी हां होती है। ठीक उसी तरह गांव की पंचायत के फैसले पर सबने ख़ुशी बयां की, और लड़की के दिल में हां था या ना, ये किसीने जानने की कोशिश नहीं की।
– अल्का मनराल