आ गया शुक्रवार? चलो, मूवी देखने चले

न्यूटन
निर्देशक: अमित मासुरकर
कलाकार: राजकुमार राओ, पंकज त्रिपाठी, अंजलि पाटिल, रघुबीर यादव
एक आदर्शवादी युवक चला है देश के सबसे बड़े चुनाव में मतदान के नियमो का पालन करवाने!
ये कहानी है न्यूटन कुमार की, एक सरकारी क्लर्क जिसे मतदान ड्यूटी के लिए भेजा गया है छत्तीसगढ़ के जंगलों में। इन जंगलों में नक्सलवादीयों का राज है, और कानून के नाम पर, कुछ नहीं। फिल्म में हसी से ये भी कहतें हैं की इन जंगलों में लोग कम, और लैंडमाइन (ज़मीन में गढ़े हुए विस्फोट) ज्यादा हैं!
ऐसी स्तिथि में न्यूटन मतदान प्रक्रिया को कायदे-कानून के साथ लागू करवाने पहुँच जाता है। उसकी मुलाकात अन्य किरदारों से होती है, और सभी उसके आदर्शवादी रवैय्ये को देख हैरान परेशान हो जाते हैं।
किस तरह से ये प्रक्रिया आगे बढती है, और न्यूटन के साथ किस तरह के अनुभव होते हैं, ये देखने सिनेमा घरों में आप जा सकते हैं।
एक लोकतंत्र के सिस्टम में किस किस तरह के उतार-चढ़ाव होते हैं, इस पर एक व्यंग के समान है ये पिक्चर न्यूटन।
और हां, इसका नाम न्यूटन क्यों है? वो भी मूवी देखकर जान पाएंगे।