आवास मिले के उम्मीद नाहीं

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जिला वाराणसी में अइसन बहुत कम गांव हव जहां लोग के मिलल होई हर गांव में कहीं लोग टुटहा घर में हउवन तो छानी छप्पर तो कहीं प्लास्टिक डाल के रहत हउवन। लेकिन लाख कोशिश कइले के बावजूद भी आवास नाहीं मिल पावत हव। अगर कहीं मिलत भी हव तो ओकरे खातिर प्रधान लोग दस दस हजार रूपइया मांगत हउवन इ कहब हव कई गांव के लोगन के।
ब्लाक चिरईगांव, गांव रघुनाथपुर इहां रामचन्द्र, शंकर राम, दशरथ के कहब हव कि इहां के आबदी लगभग डेढ़ सौ हव आउर सब लोग मड़ई करकट लगा के रहत हयन। का इ सब योजना सरकार हमनी खातिर ना बनावत। गर्मी में आंधी तूफान चलअला तो हमनी के छत भी उड़ जाला। आउर हमनी के एतना पूजी नाहीं हव कि हमनी खुद से बना लेई। आउर एतना ही नाहीं गांव में आवास खातिर गांव के प्रधान दस हजार रूपइया मांगत हयन अब अइसे हाल में हमनी कहां से पइसा लियाके देई आउर आवास बनवाई। प्रधान राम केवल के कहब हव कि दू महीना पहिले राम मनोहर लोहिया के तिरपन आवास के प्रस्ताव देहले हई। आउर जब बजट आई तो बन जाई। इ सब खातिर गांव वालन से एको पइसा ना लेवल जात हव।
ब्लाक चोलापुर गांव अजगरा हरिजन बस्ती इहां के संजीव कुमार, चुन्नु लाल, मीना देवी, पिन्टू, छाया समेत आउर कई लोग के कहब हव कि हमनी के कमाई के मामले में खर्च बहुत ज्यादा हव आउर बी.पी.एल. सूची में नाम रहते हुए भी हमनी के आवास नाहीं मिलत । बरसात के दिन में जब पानी बरसअला तो पूरा पानी हमनी के घर में भर जाला। आउर सब सामान भींग जाला। हमनी लइकन के पेट चलाइब कि घर बनवाइब। एकरे बारे में इहां के प्रधान राधिका के पति धनन्जय के कहब हव कि हम गांव में बारह आवास बनवइली। आउर जेकर बी.पी.एल. सूची में नाम नाहीं हव ओके कहां से आवास मिली। आउर आवास खातिर बजट भी नाहीं आवत हव कि देई।
ब्लाक अराजीलाइन्स गांव जोगापुर चिन्ता, नन्दलाल, आउर सन्तोष कुमार के कहब हव कि हमनी कई साल से मिट्टी के घर में रहत आवत हई आउर इ हमनी के पीढ़ी दर पीढ़ी इचलत आवत हव आउर हमनी के हालत में कउनों तरे के बदलाव ना होत हव। गांव में तीन साल से एको आवास ना आयल हव हर मौसम में एही मड़ई झोपड़ी में गुजारा करे के पड़अला। इहां के प्रधान इन्द्रावती के कहब हव कि हमरे कार्यकाल में तो चार आवास आयल रहल। आउर अभहीं अउरों आवास के प्रस्ताव देहले हई जब बजट आई तो मिली ।