आम आदमी का अधिकार – आधार मिलना मुष्किल

Kshetriya - Chitrakoot

चित्रकूट जिले में दो महीने से आधार कार्ड बन रहे हैं। पर अब तक अधिकतर लोग आधार कार्ड बनाने के लिए ब्लाक और तहसील के चक्कर ही काट रहे हैं । लोग बहुत किराया लगा के ब्लाक तक आते हैं। दिन भर बैठने के बाद खाली हाथ लौट जाते हैं।
मऊ ब्लाक, गांव हर्दी कला, कड़ैहा पुरवा। यहां की आशा, उर्मिला, केमली और राजकली एक महीने से आधार कार्ड बनवाने के लिए प्रधान से कह चुकी हैं। प्रधान पंकज देवी के पति देव शंकर का कहना है कि विधवा और वृद्धा महिलाओं के एक सौ इकत्तीस फार्म भरे हैं । तहसील में जमा करने हैं।
मानिकपुर ब्लाक में बासठ ग्राम पंचायत हैं। यहां हजारों की संख्या में लोग आधार कार्ड बनवाने के लिए चक्कर लगा रहे हैं। जरवा गांव की रामकली और रानी समेत बहुत से लोगों का कहना है कि अपना काम धंधा छोड़ कर मानिकपुर चार दिन से बराबर आ रहे हैं। अगर ऐसा ही रहा तो भूखे रहने की स्थिति आ जाएगी। कुछ इसी तरह बताती है पूजा। पूजा मानिकपुर ब्लाक, हेला बगदरी गांव में रहती है। अपने छोटे-छोटे बच्चों को छोड़़कर आधार कार्ड बनवाने के लिए आई थी। उसने बताया कि सरकार तो रोज़ नई योजना बनाती है। गरीब लोगों से हर तरह का प्रारूप मांगती है। परेशान को और परेषान करती है।
इस मामले में मानिकपुर ब्लाक के बड़े बाबू उर्दू ने बताया कि अभी तक दस हज़ार आधार कार्ड बन चुके हैं। एक ही कम्प्यूटर होने के कारण आधार कार्ड बनाने में समय लगता है। जिला चित्रकूट के अपर उप जिलाधिकारी चन्द्र प्रकाष उपाध्याय का कहना है कि आधार कार्ड बनाने के लिए एक न्याय पंचायत के लोगों को एक दिन में आना होता है जबकि कई गांवों से लोग इकट्ठा आ जाते हैं ।

कैसे उठाएं आधार कार्ड का लाभ?

प्रशासन के अनुसार आधार कार्ड बनाने में उत्तर प्रदेष पहले नम्बर पर है।
भू लेख इंचार्ज अनिल तिवारी ने बताया कि जिले में पेंषन धारक आधार कार्ड कुल छत्तीस हज़ार पांच सौ चैबिस बन चुके हैं। कुछ अभी बाकी हंै। सामान्य आधार कार्ड तिरान्वे हज़ार पांच सौ बने हैं। उन्होंने कहा कि आधार कार्ड बनने का काम 31 दिसम्बर 2013 तक चलेगा।
अपर उप जिलाधिकारी कहते हैं कि एक दिन में एक न्याय पंचायत के लोगों का कार्ड बनता है। तो आम जनता को कैसे सूचित किया जाता है कि किस दिन किसका कार्ड बनना है? आज भी हर योजना के लिए कोई विशेष पहचान पत्र की मांग की जा रही है।