आपन रुपिया निकारै मा बैंकन मा काहे लागत रोक?

आपन रूपिया निकारे मा रोक

नोटबंदी जब से भे हवै तब से आम जनता तौ तबाह होइगा हवै। मड़ई भले कहत हवै कि कउनौ परेशानी नही होत आय पै बैंकन से आपन जमा रुपिया निकारे मा खून पसीना एक होवा जात हवै। बैंक मा रुपिया निकारै जाओ तो हुवा के कर्मचारी अउर अधिकारी कहत हवै कि एक दरकी मा दस हजार रुपिया से ज्यादा नहीं निकाल सकत हन साथै सिक्का दुई हजार के लेइहौं तबै रुपिया दीन जई। या समस्या से चित्रकूट जिला के लाखन मड़ई परेशान हवैं।
मानिकपुर के कैलाश का कहब हवै कि वहिकर लड़की के शादी रहै मई मा पचास हजार रुपिया निकारै का रहै स्टेट बैंक कर्वी से तौ नहीं निकरा अधिकारी कहत हवैं एक हफ्ता मा दस हजार बस मिली मैं कसत अपने लडकी के शादी करिहौं?
मऊ के रहै वाली मीरा बतावत हवै कि उनके बच्चन का स्कूल मा नाम लिखावै का रहै 1 मई का बैंक से तीस हजार रुपिया निकारै गई तौ रुपिया नही निकरा कहिन दूसर फार्म भरौ तबै दस हजार मिली या बाद मा आयेव।
जबै दूसरे हफ्ता गई तौ फेर दस हजार रुपिया बस मिला हवै। जेहिसे मोर बच्चन का नाम स्कूल मा नही लिख पावा आय। अब मोहिका लेट फ़ीस दे का परी तबै बच्चन का नाम लिखा जई.
मऊ के राजेन्द्र बताइन कि मैं चालिस हजार रुपिया निकारै पहिले मऊ के डाकखाने मा गयेव हुवा कहिन कि रुपिया नही आय शाम के आयेव तौ कोशिश कीन जई शाम के गये तौ फेर रुपिया नही मिला बाबू कहिस पांच हजार मिली। या से मैं कॉर्पोरेटिव बैंक गये हुंवा भी रुपिया नहीं मिला बाद मा मोहिका दूसरेन से ले का परा हवै। का फायदा बैंक मा रुपिया जमा करै से हमरेन रुपिया नहीं देत आही।
कर्वी के कुछ मड़ई कहत हवै कि मोदी सरकार हम पंचन से कसत चाल चलिस हवैं कि मड़ई आपन कमाई का रुपिया निकारै खातिर बैंकन के चक्कर लगावत हवैं। अधिकारी कहत हवैं कि बैंकन मा रुपिया नही आय? यहिमा जमा करै वाले के कउन गलती हवै?