आज है कार्गिल दिवस

कारगिल की चोटी पर पाकिस्तानी सेना को परस्त कर तिरंगा लहराने वाले हमारे वीर जवानों को आज पूरा देश याद कर रहा है।

आज से 18 साल पहले भारत और पाकिस्तान के बीच कारगिल का युद्ध लड़ा गया था। लगभग दो महीने तक चले इस युद्ध में दोनों देशों के कई सैनिक मारे गए थे और आज के दिन यानी 26 जुलाई, 1999 में भारत ने कारगिल की जंग जीत ली थी, तभी से इस दिन को कारगिल विजय दिवस के रूम में मनाया जा रहा है।

करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर कारगिल में लड़ी गई इस जंग में देश ने लगभग 527 से ज्यादा वीर योद्धाओं को खोया था वहीं 1300 से ज्यादा घायल हुए थे। इस युद्ध में बड़ी संख्या में रॉकेट और बम का इस्तेमाल किया गया। इस दौरान करीब दो लाख पचास हजार गोले दागे गए। वहीं 5,000 बम फायर करने के लिए 300 से ज्यादा मोर्टार, तोपों और रॉकेट का इस्तेमाल किया गया। लड़ाई के 17 दिनों में हर रोज प्रति मिनट में एक राउंड फायर किया गया। बताया जाता है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यही एक ऐसा युद्ध था जिसमें दुश्मन देश की सेना पर इतनी बड़ी संख्या में बमबारी की गई थी।

बताया जाता है कि कारगिल में ऊंचाई पर बैठे दुश्मन तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन भारतीय सेना ने एक खास ‘ट्रिक’ अपनाकर इसे मुमकिन बनाया। ये ट्रिक कुछ और नहीं, बल्कि एक खास ट्रेनिंग थी, साइलेंट मूवमेंट।

दरअसल, इस ट्रिक में पहाड़ों पर दुश्मन की ओर बढ़ते हुए इस इस ‘साइलेंट मूवमेंट’ में जवानों अफसरों को गोली लगने के बाद घायलावस्था में कराहने तक की इजाजत नहीं थी। आंखों की भाषा को समझकर आगे बढ़ते हुए दुश्मन के बंकरों को ढूंढ कर उन पर हमला बोलना था ताकि दुश्मन को संभलने और फायरिंग का मौका ही मिले। भारतीय सेना की ये रणनीति कई मोर्चों पर कारगर साबित हुई।

वहीं, आज लखनऊ में कारगिल शहीद स्मृति वाटिका में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पाकिस्तान ने कारगिल में घुसपैठ कर भारत पर युद्ध थोपा था। इससे पहले उन्होंने ट्वीट कर शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी थी।

इस दौरान उन्होंने ऐलान किया कि प्रदेश के सभी 17 नगर निगमों में शहीदों और वीर सपूतों की समृति में पार्क बनेंगे। आज का दिन भारत के शौर्य, पराक्रम और स्वाभिमान का दिन है। भारत के वीर सपूतों के प्रति सम्मान प्रकट करते हुए विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिवारजनों को स्मृति चिन्ह, शॉल और माला पहनाकर सम्मानित किया।