आगरा में बसपा ने फूंका चुनावी बिगुल, विरोधियों को लताड़ा

unnamedबहुजन समाज पार्टी ने 21 अगस्त को आगरा में सर्वजन सुखाय, सर्वजन हितायनामक रैली का आयोजन करके उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंका। इस रैली में आगरा के कोठी मीना बाजार शाहगंज में चारों तरफ बसपा के झंडे और बैनर दिखाई दे रहे थे। यह अब तक की रिकॉर्ड तोड़ जनसभा बताई जा रही है।

आगरा रैली से चुनावी बिगुल फूंकते हुए बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने विपक्षियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। मायावती ने प्रदेश में बदहाल कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए राज्य के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर निशाना साधा। रैली के दौरान बुलन्दशहर सामूहिक बलात्कार कांड का जिक्र करते हुए मायावती ने कहा कि, सूबे में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन अखिलेश राज्य में विकास और शांति की झूठी कहानी जनता को सुना रहे हैं।

लोकसभा चुनाव की बातों को मायावती ने याद करते हुए कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में किया गया एक भी वादा मोदी और भाजपा सरकार ने पूरा नहीं किया है। गरीबों को सस्ता राशन नहीं मिला साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने ऐसे कानून बना दिए हैं, जिनसे व्यापारियों की हालत खराब है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान 100 दिन के अंदर काला धन वापस लाकर गरीबों के बीच बांटने का वादा किया गया था लेकिन अब मोदी सरकार ही काला धन सफेद करने का फार्मूला ला रही है।

पिछले दिनों गुजरात में दलितों पर हुए हमलों को लेकर मायावती ने भाजपा और केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की। मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार संघ के साथ मिलकर आरक्षण को खत्म करना चाहती है। मायावती ने राज्य सरकार और केंद्र सरकार पर मिली भगत का आरोप लगाते हुए कहा कि मिलीभगत के कारण प्रदेश में कई जगह सांप्रदायिक घटनाएं हुईं हैं।      

मायावती ने कांग्रेस की नेता शीला दीक्षित पर भी हमला बोला और कहा, कांग्रेस ने शीला को सीएम उम्मीदवार बनाया है जिन्होंने दिल्ली को बर्बाद कर दिया था।

इस दौरान मायावती ने मीडिया पर भी पक्षपात करने का आरोप लगाते हुए कहा कि टीवी और अखबार पैसेवालों की पार्टियों के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसका उदाहरण यूपी के 2007 के चुनाव हैं। इन चुनावों के वक्त बसपा को तीसरे नंबर पर जानबूझकर बताया गया था लेकिन वो नंबर वन की पूर्ण बहुमत की पार्टी बनकर उभरी थी। मायावती ने कहा टीवी चैनलों को पैसे देकर बसपा की विरोधी पार्टियां अपने हिसाब से सर्वे के आंकड़े दिखा रही हैं।