आखिर मड़इन का काहे नीं मिल पावत लाभ

पंचायतीराज चुनाव के  घोषणा 24 जुलाई कइ दीन गे हवै। अगले चुनाव अक्टूबर मा हवै। गांव मा यहिके तैयारी जोर शोर से चलत हवैं। मड़ई आपन प्रत्याशाी का चुनै मा जोर शोर से लाग हवै। राज्य सरकार अउर केन्द्र सराकर भले ही अपने तरफ से योजना चलाइस हवै। पै आम जतना योजना कके लाभ से वंचित हवै। लोहिया गांव होय के बादौ बुंदेलखण्ड मा विकास के कमी हवै। सरकार द्वारा चलाई गे योजना का लाभ भी बहुतै कम पात्र मड़इन का मिल पावत हवै।

गांव के प्रधानन का पंचवर्षीय पूर होय वाला हवै। अगर देखा जाये कि प्रधान अपने गांव मा विकास अउर पात्र मड़इन का कालोनी के व्यवस्था कराइन हवैं तौ पता लागत हवै कि कउना से गांव मा केत्ता विकास अउर पात्र लोगन का कालोनी तक नहीं मिली हवै। उंई मड़इन का झोपड़ी मा रहत पीढ़ी बीत गें। का पात्र मड़इन खातिर कालोनी के व्यवस्था करब प्रधान के जिम्मदारी नहीं आय? गांव मा ज्यादातर अपात्र अउर रुपिया वाले मड़इन का हर सरकारी योजना का लाभ मिलत हवै। यहिके पीछे कारन हवै कि प्रधान गरीबन खातिर कउनौ सुविधा नहीं करत हवै।

अब बात या हवै कि का गांव मा जा के बी डी ओ अउर सी डी ओ का यहिके बारे मा कउनौ जानकारी नहीं रहत। या फेर गांव जा के पात्र अउर अपात्र मड़इन के जांच नहीं करत आही? अगर गांव जा के अधिकारी जांच करै तौ पात्र मड़इन का योजना का लाभ मिल सकत हवै?