आइए देखते हैं वो कजली मेला जिसमें आल्हा-उदल ने अपनी बहन को बचाने के लिए पृथ्वीराज को हराया

जिला महोबा, शहर महोबा, आओ देखे बो कजली मेला जीमे आल्हा ऊदल ने अपनी बहिन के लाने पृथ्वीराज को हराओ। राखी के दूसरे दिन लगबे वालो कजली मेला एतहासिक विरासत में से एक हे।जिला महोबा, शहर महोबा आओ देखे बो कजली मेला जीमे आल्हा ऊदल ने अपनी बहिन के लाने पृथ्वीराज को हराओ। राखी के दूसरे दिन लगबे वालो कजली मेला एतहासिक विरासत में से एक हे। कई जात के सन ग्यारह सौ ब्यासी में राजा की बेटी चन्द्रवली जब राखी के दिन अपनी सहेलीयन के संगे भुजरिया सिराबे गयी तबीई पृथ्वीराज के सेनापति चन्द्रवली को अपहरण करबे पहुच गये। बा समय महोबा के योद्धा माने जाबे वाले आल्हा ऊदल राज्य से विकसित हे। जब उन ने अपहरण की खबर सुनी तो साधू को भेष बना के अपनी बहन को बचाबे पहुच गये और पृथ्वीराज के सेनापति को हराओ। तबई से कजली महोत्सव मनाओ जा रओ। तबई आल्हा गीत के बीना कजली अधूरी रत शांति ने बताई के पहले राजा की रानी खोटत ती आल्हा ऊदल राजवंशी हते सो जैसो राजा करत आय सो अब हम कर रए। शरद तिवारी ने बताई के इते सब जाति को आपस में संगम हे जाको पूरो श्रेय आल्हा ऊदल और महोबा की जनता को जात। रामबाबू यादव ने बताई के हमाई संस्कृति हमाई सभ्यता मर ना पाए जो हमाये पुरखन की धरोहर हे बाको उजागर करबो हमाओ कर्तव्य हे। जोई हमाय देश की पहचान हे हमाई संस्कृति हे। जे तो हती एतिहासिक बाते और अब इते अबे भी जो कजली मेला रिश्तेदारन को जोडबे को काम करत दूर दूर से रिश्तेदार कजली देख बे आत। लल्ला रजक ने बताई के जो कजली मेला बोहतई प्रसिद्ध हे इते बहुत सी चीजे देखबे को मिलती।

रिपोर्टर- श्यामकली

Published on Aug 11, 2017