आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का बढ़ा मानदेय, संघर्ष की जीत हुई

साभार:गणशक्ति
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अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने पिछले दिनों जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया और प्रदर्शन में चेतावनी दी कि यदि 6 नवम्बर तक उनकी मांगें पूरी नहीं की गईं तो आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठेंगी। यह आंदोलन विकराल रूप ले चुका था, जिसे देखते हुए सरकार को झुकना पड़ा और 28 सितम्बर को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कुछ मांगे मान ली गईं। प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी, मिनी और सहायक कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का फैसला लिया है। इससे तीन लाख 30 हजार कार्यकर्ता लाभान्वित होंगे। नया मानदेय अक्टबूर से लागू हो जाएगा।
28 सितम्बर की शाम बाल विकास एवं पुष्टहार विभाग की ओर से मानदेय बढ़ाने का आदेश भी जारी कर दिया गया। शासन ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कुछ अन्य मांगों पर भी सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का आश्वासन दिया है।
गौरतलब है कि लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज के बाद प्रदेश भर के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने लखनऊ में तमाम मार्ग जाम कर दिए थे।

ये हैं मांगें—

-राज्य कर्मचारी का दर्जा दिया जाए
-18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन दिया जाये
-सेवानिवृत्त होने पर दो लाख रुपये भत्ता दिया जाये- प्राथमिक विद्यालयों में आंगनबाड़ी
-कार्यकर्ताओं की सीधी भर्ती करायी जाये
-राज्य कर्मचारियों की तरह चिकित्सा सुविधाएं दी जाये
-मृत्यु होने पर आश्रितों को नौकरी दी जाये
-हौसला पोषण योजना में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की एकल खाता संचालित करवाया जाये
-पल्स पोलियो, बीएलओ एवं अन्य सरकारी कार्यक्रमों में पारिश्रमिक दिए जाये

प्रदेश सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में 800, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के मानदेय में 750 रुपये व सहायिका के मानदेय में 500 रुपये का इजाफा करने का आदेश दिया गया, लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकत्री इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्हें न्यूनतम 18 हजार रुपये मानदेय चाहिए। साथ ही राज्य कर्मचारी घोषित किए जाने की मांग पर भी अड़ी हैं जिसके चलते कलक्ट्रेट पर निरंतर धरना प्रदर्शन जारी है।