आँखों से भले ही सूर हों लेकिन दिल से हैं बहुत जिंदादिल, बाराबंकी के दयाराम की कहानी

जिला बाराबंकी, ब्लाक बनीकोडार, गांव गनी का पुरवा हम सब अक्सर अधियार हुवे पै डेराय जाइथी अउर जल्दी से जल्दी उजाला हुवय के कामना करीथी लकिन जरा वहि इंसान के बारे मा सोचा जाय जेकरे जीवन मा रोशनी न हुवय के बावजूद वह अपने हुनर के रोशनी से मनइन कै मनोरंजन कराथे।जी हाँ हम बात करत हई बाराबंकी जिला के गनी का पुरवा के दयाराम कै। जवन बचपन से ही देख नाय पउते।
दयाराम उर्फ़ सूरदास कलाकार के कहब बाय कि पांच साल कै रहेंन तबै से हमै बांसुरी कै शौक रहा।रेडियो मा बांसुरी के आवाज सुनिके हमार दिल खुश होय जात रहा। जहां भी जाई थी सब बांसुरी बजावै का कहा थिन सबका बहुत पसंद आवाथै।
दयाराम पन्द्रह साल के उम्र से ही बांसुरी अउर ढ़ोल बजाउब शुरू कै दिहिन।अउर आज भी इनके बांसुरी से लगाव कम नाय भा। जब भी तनहा हुआथे अपने बांसुरी के साथ ही आपन समय बितावाथे। आसपास केमनई का उनके पास बैठ के उनके बांसुरी कै आवाज सुनै मा बहुत मजा आवाथै। दयाराम अपने गांव ही नाय बल्कि उन सब कै प्रेरणा श्रोत अहैं जवन जरा सी ठोकर लागै पै भी हिम्मत हार जाथिन।

रिपोर्टर- नसरीन

08/06/2017 को प्रकाशित