अस्पतालों में डाक्टरों की कमी

जिला अंबेडकर नगर।  जिले में पिछले करीब चार महीनों से कोई भी महिला डाक्टर नहीं है। कटेहरी ब्लाक में तीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और छह उपस्वास्थ्य केंद्र हैं। लेकिन कोई भी महिला डाक्टर न होने से महिलाएं बिना जांच करवाए ही लौट जाती हैं।
गांव बरहनियामत चक की मंजू देवी और रामावती कटहरी के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी अंदरूनी बीमारी का इलाज करवाने गए थे। वहां केवल पुरुष डाक्टर थे। दोनों बिना जांच ही लौट आए।
जिवधर ग्राम सभा के पुरवा छितौनी की रीता देवी गर्भवती हैं और बार बार टट्टी जाना पड़ता है। पेड़ू और पेट में दर्द, पांव में सूजन दिखाने के लिए कोई नहीं है। कटहरी के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि यहां महिला डाक्टर नेहा श्रीवास्तव हैं। वह तीन चार महीने से बिना किसी सूचना के अस्पताल नहीं आ रही हैं। सी.एम.ओ. को कई बार सूचना दी जा चुकी है। सी.एम.ओ. आफिस से मिली जानकारी के अनुसार जिले में चार महिला डाक्टर होनी चाहिए।

जिला चित्रकूट और बांदा। यहां पर लगातार स्टाफ की कमी बनी हुई है। चित्रकूट जिले में 36 डाक्टरों की नियुक्ति होनी चाहिए तो यहां केवल 18 डाक्टर हैं। पूरे ज़िले में केवल एक ही महिला डाक्टर है। रेडियोलाजिस्ट और पैथोलाजिस्ट हैं ही नहीं। नतीजन, गर्भवती महिलाओं को जांच के लिए बांदा रिफर किया जाता है। दूसरी तरफ बांदा में 116 डाक्टरों के पद हैं जबकि केवल 53 डाक्टर ही नियुक्त हैं।