अरे ये तो कार्टून बनाने का जादूगर है, आइए मिलते हैं अम्बेडकरनगर के शैलेन्द्र से

जिला अम्बेडकरनगर, ब्लाक भीटी, गांव तकिया कानूनगो कार्टून कामिक्स कै दुनियां बहुत ही चटपटी अउर निराली हुआथै आपका चाचा चौधरी याद बाय या फिर चंपक का तौ आप  भूल ही ना पाये होइहें।यै तौ किरदार हुवय आज हम आपका मिलवाउब शैलेन्द्र से जवन कार्टून बनावत अउर सिखावाथिन।जिला अम्बेडकरनगर, ब्लाक भीटी, गांव तकिया कानूनगो कार्टून कामिक्स कै दुनियां बहुत ही चटपटी अउर निराली हुआथै आपका चाचा चौधरी याद बाय या फिर चंपक का तौ आप  भूल ही ना पाये होइहें।यै तौ किरदार हुवय आज हम आपका मिलवाउब शैलेन्द्र से जवन कार्टून बनावत अउर सिखावाथिन। शैलेन्द्र कुमार बताइन की हम अपने गांव मा बाल जागृति से जुड़ा हई  ई एक संगठन आय।वहिसे हमै अवसर मिला कार्टून कामिक्स सीखय का धीरे-धीरे हमार रूचि बढ़त गय। पानी संस्थान एक एनजीओ आय वकरे माध्यम से एपीएनडी नाम के स्कूल मा हमैं कार्टून बनावै सिखावै कै मौका भी मिला। करीब चार-पांच ट्रेनिंग हम लै चुका हई। रवि कुमार कार्टून सीखय  वाला छात्र के कहब बाय की सीखे मा बहुत मजा आय बहुत कुछ बनावै जान गयन।लड़का, औरत बगल का चेहरा, चिड़िया जैसे बहुत चीज सीखेंन।दीपिका कुमारी छात्रा कै कहब बाय की बैठी लड़की, पेड़ पौधा, तरह-तरह कै कार्टून सब सिखावा जाथै। शैलेन्द्र कुमार कै कहब बाय की कार्टून के माध्यम से बाल विवाह,जन्म प्रमाण पत्र, बाल मजदूरी, पर्यावरण जैसे अनेक मुद्दा पै कार्टून बनाईथी। बाल श्रम पै भी जागरूक करेन अबहीं पूरी तरह से नाय खत्म भा बाय। हमार लक्ष्य बाय की हम कार्टून कामिक्स कलाकार बनी।अवसर मिला तौ अउर गेदहरन का भी सिखाउब।

रिपोर्टर- प्रियंका

Published on Jul 7, 2017