अमेरिका में नस्लभेद का शिकार एक मुस्लिम लड़का

(फोटो साभार - इंडियन एक्सप्रेस)
(फोटो साभार – इंडियन एक्सप्रेस)

वाशिंगटन, अमेरिका। अमेरिका में चैदह साल के नौवीं कक्षा के एक मुस्लिम लड़के को 21 सितंबर को हिरासत में लिया गया था। इसका कारण उसके द्वारा बनाई एक घड़ी थी। दरअसल यह लड़का तकनीकी रूप से काफी दक्ष है। उसने एक घड़ी का अविष्कार किया था। इसे दिखाने जब वह अपने स्कूल गया तो टीचर ने इसे बम समझकर पुलिस को बुला लिया। पुलिस ने अहमद को हिरासत में भी ले लिया। हालांकि बाद में उसे छोड़ भी दिया। मगर स्कूल से उसे तीन दिन के लिए सस्पेंड कर दिया गया।
अहमद को हिरासत में लेने और स्कूल के टीचर के रवैए पर सोशल मीडिया पर अभियान चलाया जा रहा है। सोशल मीडिया पर लोग सवाल कर रहे हैं कि आखिर मुस्लिमों के प्रति अमेरिका में यह कैसा नजरिया है ? इस्लामोफोबिया यानी इस्लाम को मानने वाले लोगों के प्रति डर क्यों भरा जा रहा है। यह भी सवाल पूछे जा रहे हैं कि आखिर इस घड़ी के अविष्कार का पता चलने के बाद स्कूल के स्टाफ ने इसे परखने की जरूरत क्यों नहीं समझी। उधर फेसबुक और गुगल जैसे बड़े ब्रांडों ने इस बच्चे की खूब सराहना की है। इसे अपने साथ जुड़ने का न्यौता भी दिया है। लोग इसे नस्लभेद से जोड़कर भी देख रहे हैं। दरअसल अमेरिका में 2014 में वहां के शहर फर्गयूसन में काले रंग के समुदाय वाले व्यक्ति को पुलिस ने एक दुकान में चोरी के आरोप मे गोली मार दी थी। लड़के की मौत हो गई थी। इसके बाद कई और मामले भी नस्लभेद से जुड़े हुए सामने आए।
एक फेसबुक पोस्ट में कहा गया है कि बच्चे के साथ हुई घटना नस्लभेद का उदाहरण है। स्कूल प्रशासन को अगर घड़ी की जगह बम होने का संदेह था तो क्या कोई बम देखकर उसे दफ्तर में रखवाता है। पुलिस आने तक वहीं ठहरता है। स्कूल प्रशासन को पता था कि यह बम नहीं घड़ी ही है। मगर क्योंकि यह अविष्कार किसी अमेरिकन ने नहीं की थी इसलिए उसके साथ यह सुलूक किया गया। इस घटना के बाद से अहमद के माता पिता और खुद अहमद भी अब उसके लिए दूसरा स्कूल तलाश रहे हैं। यहां तक कि वह अमेरिका छोड़ने का मन भी बना रहे हैं।