अब पूरे साल जारी रहेंगे नसबंदी कैम्प

iuyhjचित्रकूट और बांदा| जि़ले में सरकारी अस्पतालों में इस समय महिलाओं के नसबंदी कैम्प शुरू हैं। चित्रकूट में जुलाई से तो बांदा में नवम्बर माह से कैम्प लग रहे हैं। हर जगह महिलाओं के लिए ही बंधन है सरकार भी उन पर ज़ोर ज़बरदस्ती करवा कर नसबंदी करवाने का आदेश देती है। क्यों नहीं यह कैम्प पुरुषों के लिए लगते ?
पहाड़ी ब्लाॅक में सितम्बर 2015 से नसंबदी कैम्प लग रहे हैं। भानपुर की मीना देवी, विमला, सुशीला, कमला देवी और मुन्नी देवी ने 29 सितम्बर को नसबंदी करवाई है। इस मामले में पहाड़ी समुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के डाॅक्टर कमलेश कुमार ने बताया कि सितम्बर से अब तक साढे़ तीन सौ महिलाओं ने नसबन्दी करवाई है। ऑपरेशन के छह घंटे के बाद मरीज़ को घर जाने दिया जाता है। इसके लिए उनको चैदह सौ रुपए मिलते हैं। साथ ही 108, 102 एम्बुलेंस गाड़ी उनको लाने और छोड़ने जाती है।
छिवलहा गांव की रमपतिया ने कहा, ‘‘मैं नसबंदी के लिए तैयार नहीं थी पर वहां की आशा ने कहा था कि नसबंदी करवाना है मेरे चार बच्चे हैं। गरीबी है इसलिए करवा ली है। पुरुष को कहा था पर उसने नहीं करवाई है। कहता है कि कमज़ोर हो जाएगा।’’ मऊ के डाॅक्टर शेखर का कहना है, ‘‘अब तक 315 नसबंदी करवाई गई हैं जि़ला बांदा में। जि़ले में हर साल कि तरह इस साल भी अस्पताल में 5 नवम्बर से नसबंदी कैम्प कि शुरुवात हो गई। कैम्प शुक्रवार और बृहस्पति के दिन लगता है जिसमें अधिकतर महिलाओं कि भीड़ रहती है। नरैनी ब्लाॅक के गांव सढ़ा की आशा कार्यकर्ता विमला और महुआ ब्लाॅक के गांव बरुवा स्योढ़ा कि आशा रांची बताती हैं, ‘‘हम लोगों को दस साल काम करते हो गए। नसबंदी केस लाने में बहुत मेहनत से महिला और उनके परिवार को समझाना पड़ता है। उनकी पूरी जि़म्मेदारी लेनी पड़ती है। पूरा दिन अस्पताल में उनके साथ घूमना पड़ता है। नसबंदी के दिन से टांके कटने तक उनकी पूरी देखभाल करनी पड़ती है। तब जा के दो सौ रुपए मिलते हैं। लाभार्थी को चैदह सौ रुपए मिलते हैं। और एम्बुलेंस घर तक छोडने जाती है। हम आशाओं को पूरे कैम्प में पांच केस देने का लक्ष्य है और एएनएम को दस तो हम लोगों से एक एक केस एएनएम भी लेती हैं।’’ नरैनी सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र से मिली जानकारी में बाबू रामकिशोर बताते हैं, ‘‘कैम्प हमेशा रहते हैं। पर इस समय 5 नवंबर से कैम्प शुरू हैं एक कैम्प में तीस लोगों का रजिस्ट्रेशन होता है। अगर उससे अधिक हैं तो दूसरे दिन ऑपरेशन होता है। पूरे ब्लाॅक में आठ सौ तैतीस का लक्ष्य है जिसमें आठ सौ तीन महिलाएं, तीस पुरुष नसबन्दी केस होने चाहिएं। इस समय सरकार नसबंदी को लेकर ब्लाॅक और जि़ला स्तर के सरकारी अस्पतालों में नसबंदी कैम्प लगवा कर परिवार नियोजन का काम बढ़-चढ़ के आशाओं के माध्यम से करवा रही है। इस काम में महिलाओं को ही आगे किया जा रहा है जबकि सरकार पुरूष नसबंदी करा पाने में बहुत पीछे है। चित्रकूट सी.एम. ओ. रामबहादुर सिंह का कहना है कि एक दिन में पैंतिस नसबंदी करने का नियम है। इससे ज्यादा नसंबंदी नहीं की जा सकती है। सरकार की तरफ से नसबंदी कराने का लक्ष्य तीन हजार अड़सठ है। अभी तक में चैदह सौ बयासी महिलाएं और सात पुरुष की नसबंदी करा चुके है। सरकार की तरफ से नसबंदी कराने वाली महिलाओं को चैदह सौ रुपए और पुरुषों के लिए दो हजार रुपए दिया जाता है। नसबंदी कराने वालों के लिए 102 और 108 नंबर की एम्बुलेंस लाने ओर छोड़ने का काम किया जाता है।