अबहूं नहीं भरे सड़क के गढ़वा

मड़ई गढ़वा मा गिर जाये तो जान चली जाये

योगी सरकार योगी सरकार का आदेश रहै की 15 जून तक हर जघा गड्ढा मुक्त होई जइहै। पै सरकार का आदेश तौ बेकार चला गा सड़क तौ आजौ वहिनतान बड़े-बड़े गड्ढा देखे का मिलत हवैं। सरकार का सोच के कहिस रहै कि 15 जून तक सड़क गड्ढा मुक्त होइ जइहै? जउन काम पिछले बीस साल से नहीं भा वा एक महीना मा कसत होई सकत हवै? दूसर कइती विभाग के अधिकारी कर्मचारी कहत हवै कि सड़क मा गढ़वा भरै का आदेश तौ सरकार दइ दिहिस पै बजट आज तक नही आवा आये तौ कसत सड़क की मलहम पट्टी करे? यहै से कइयौ जघा के सड़क बेकार पड़ी हवैं। हमार यहिमा कउनौ गलती नहीं आय?  मानिकपुर के सुअरगढ़ा गांव के एक किलोमीटर सड़क के हाल बहुतै कहब हवै बड़े बड़े गड्ढा हवैं। जेहिमा मड़ई निकर तक नहीं पावत आहीं गाड़ी मोटर तौ निकरै के दूर के बात हवैं। कइयौ दरकी प्रधान अउर ब्लाक मा शिकायत करे हन पै कउनौ सुनवाई नहीं होत आय। पता नहीं हमरे गांव के सड़क कत्तो बनी कि ना बनी? यहिनतान मऊ सब्जी मण्डी के सड़क के हाल बहुतै खराब हवै।

का यहै आये गढ़वा मुक्त सड़क

नाली का पता नही आय सड़क के बातै दूर हवै सड़क कांदौ से भरी रहत हवै। सरकार कउनतान के गड्ढा मुक्त के बात करत हवै। गांव के हाल तौ बेहाल हवै। पै जउन राष्ट्रीय राजमार्ग हवै वा भी आज तक नहीं बनी आय।  कर्वी मऊ अउर इलाहाबाद तक के सड़क के बीच बीच मा गड्ढा बने हवैं। का सरकार यहिका गड्ढा मुक्त के बात करत हवै। का बिना बजट के सड़क बन सकत हवै या केवल सरकार का आदेश बस सुनत रही। सरकार काहे नहीं अपने आदेश का पलट के देखत हवै कि जउन काम होय का चाही वा होत हवै कि नहीं? जनता सरकार का चुनत हवै कि जीतै के बात विकास होइ? पै हिया तौ लागत हवै कि जनता के विकस के चिंता सरकार का नहीं आय? आपन जरुर चिंता हवै?