‘‘अबकी बारिस तो फिर डूबेंगे घर’’

लखनऊ। ‘‘कइयों की जानें ले चुका है, ये नाला। कोई बच्चा कब खेलते खेलते इस नाले में अपनी जान गंवा देगा किसी को पता नहीं।’’ बाबू बनारसी दास वार्ड नंबर 76 में रहने वाले 27 साल के मोहम्मद तौफीक की इन बातों से इतना अंदाजा तो हो जाता है कि आसपास बसी बस्ती के लिए ये नहर कितनी खतरनाक है। हैदर कैनाल नहर उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बीचों बीच गोमती से लेकर कानपुर रोड तक फैली है।

21 फरवरी, 2012 को नहर के किनारे बस्ती में रहने वाली पिंकी तिवारी का ढाई साल का बेटा गिरकर मर गया। इससे पहले और भी लोगों की जानें जा चुकी हैं। अब मेरी तीन बेटियां हैं, उनके लिए भी डर लगा रहता है। 70 साल से ऊपर की हो चुकी जाफरा ने उंगलियों से इशारा करते हुए बताया हर बरसात में हम ऊंचाई में चले जाते हैं। हर बार हमारे घर डूबते हैं। कई बार फुटपाथ पर रातें गुजारीं। केस कुमारी का कहना है,‘‘बाढ़ का डर तो केवल बरसात में होता है लेकिन बच्चों के डूबने का डर पूरे साल रहता है।’’यहां की पार्षद अनीसा सिद्दकी ने बताया कि नहर के दोनों तरफ दीवार खड़ी करने के लिए बजट पास हो गया है। बरसात खत्म होते ही काम शुरू हो जाएगा। उनके बेटे अजीम ने बताया कि बस्ती में पानी, बिजली की व्यवस्था और सड़क बनवाने के लिए हमने मुख्यमंत्री कोष से मिलने वाली मदद के लिए भी प्रोजेक्ट तैयार किया है। लखनऊ नगर निगम में अधिशासी अभियंता डी डी गुप्ता ने बताया कि 19 लाख का बजट पास किया गया है। बारिश के बाद काम शुरू हो जाएगा। सवाल यह उठता है कि अब तक निगम का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया?