अफ्रीका में विधवाओं की कहानी

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अफ्रीका में कैमरून देश के दौअला शहर में क्लारीस और उनके पति रहते थे। जब मलेरिया के कारण उनके पति की मृत्यु हुई तो उन्हें घर से बाहर कर दिया गया, और उन्हें अपने देवर से शादी करने को मजबूर किया गया। दूसरी शादी होने के बाद ही, क्लारीस  को सिफिलिस हो गया जो एक यौन संचारित रोग है।

‘मेरे पति ने मुझ पर झूठा आरोप लगाया कि मेरा शादी के बाहर किसी और के साथ संबंध था. हर कोई मुझे डायन बुला रहा था और सब बोल रहे थे कि मैंने अपने पति को मारा है…. मेरी सौतेली माँ मुझे मारने की धमकी दे रही थी,’ क्लारीस ने कहा। क्लारीस अपनी बेटी के साथ भाग गयीं और अब दौअला के नदी के पास एक पुरानी लकड़ी के झोपड़ी में रहती हैं।

अन्तराष्ट्रीय विधवा दिवस के अवसर पर अफ्रीका की महिला अधिकार प्रचारकों के अनुसार, उप- सहारा अफ्रीका (सब सहारा क्षेत्र जो सहारा रेगिस्तान के दक्षिण का क्षेत्र है) में लाखों ऐसी विधवाएँ हैं जिनकी संपत्ति लूट ली जाती है और वो बेहद गरीबी में रहती हैं।

क्लारीस की तरह, कई ऐसी महिलाएँ हैं जिनके ससुराल वाले उनसे दुर्व्यवहार करते हैं, और उनका शोषण भी करते हैं। उन्हें विधवा विरासत नाम की प्रथा के अंतर्गत, अपने पति के किसी रिश्तेदार से शादी करनी पड़ती है।

विधवा विरासत और विधवाओं को घर से निकलने की वजह से अफ़्रीकी महाद्वीप में एच.आई.वी फैल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम अफ्रीका में सबसे बड़े एबोला विषाणु के फैलाव में भी इसका योगदान हो सकता है।

अफ्रीका के राष्ट्रीय और सामाजिक कानून विधवा को उसके पति के संपत्ति में हक़ नहीं देते। कई बार महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी भी नहीं होती।

‘कई महिलाओं की छोटी उम्र में अपने से काफी बड़े आदमियों से शादी हो जाती है। वो कम उम्र में ही विधवा हो जातीं हैं, और फिर अपनी बेटियों की भी जल्दी ही शादी कर देतीं हैं’, बेथनी ब्राउन ने कहा जो अन्तराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्था में विधवाओं पर विशेषज्ञ हैं।