अपर्याप्त पेंशन के कारण भारत में बुजुर्गों को नहीं मिल पा रहा काम

साभार: पिक्साबे

कमला देवी (नाम बदला हुआ) उदयपुर के एक आदिवासी गांव में रहती हैं। वह बकरी चराने का काम करती हैं। कमला से जब सरकार की पेंशन योजना के बारे में पूछते हैं, तो वह बताती हैं कि उन्हें पेंशन तो मिल रहीं है, पर वह पेंशन नहीं लेना चाहती हैं। उनके अनुसार पेंशन के  कारण उन्हें मनरेगा में काम नहीं मिल रहा हैं। वह काम करना चाहती हैं।

वृद्धावस्था में पेंशन देने का मकसद इस उम्र में उन्हें आराम का जीवन देना हैं। सरकारी और अन्य क्षेत्रों में सेवानिवृत्ति होने के बाद पेंशन दी जाती है। पर कुछ ऐसे भी काम हैं, जिसमें आयु और पेंशन की व्यवस्था नहीं है।

‘राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण’ द्वारा किए गए रोजगार-बेरोजगारी सर्वेक्षण 2011-12 के 68 वें दौर के अनुसार, भारत के करीब -38 फीसदी बुजुर्गों का काम करना जारी है। जनगणना 2011 के अनुसार, देश में 10.3 करोड़ बुजुर्गों हैं और वेतन पर काम करने वाले बुजुर्गों की संख्या 3.9 करोड़ है।

‘सेंटर फॉर इक्विटी स्टडीज’ (सीईएस) ने अगस्त से अक्टूबर 2016 तक ग्रामीण और शहरी राजस्थान के सात जगह में एक अध्ययन किया । हालांकि अप्रकाशित अध्ययन में आय सुरक्षा के बिना बुजुर्गों के अनुभव को समझने के लिए 55 वर्ष से अधिक आयु के 791 लोगों से बातचीत की, जिसमें से 57 फीसदी महिलाएं और 43 फीसदी पुरुष थे।   

अध्ययन में मुख्य बात ये पीटीए चली कि पर्याप्त आय और सामाजिक सुरक्षा के नहीं होने के कारण बुजुर्गों के पास कार्य, वेतन और क्षेत्र को पसंद करने का कोई विकल्प नहीं है।

एक चौथाई बुजुर्गों ने कहा कि वे पर्याप्त पेंशन मिले के बाद भी काम करना चाहते हैं। 23 फीसदी ने कहा कि वे कम काम करेंगे , जबकि 25 फीसदी  ने पर्याप्त पेंशन मिलने पर काम नहीं करने की बात कही।  

एक पर्याप्त पेंशन कितनी हो? तो पेंशन 1,875 रुपए आई, जो आज की महीन की पेंशन से  तीन गुना अधिक है। ऐसे लोग जिन्होंने कहा कि वे पहले के मुकाबले कम काम करेंगे या काम ही नहीं करेंगे, उनके लिए पर्याप्त पेंशन का मतलब 2,000 रुपए है, जो  अभी दी जा रही पेंशन से चार गुना है।

26 फीसदी महिलों की तुलना में 36 फीसदी पुरुष ने पर्याप्त पेंशन मिलने पर कम काम करने की बात कही है। हालांकि एक तिहाई से अधिक पुरुषों और महिलाओं के अनुपात ने कहा कि वे पेंशन के बावजूद काम करना जारी रखेंगे।

पर्याप्त पेंशन के बिना ऐसा करना मुश्किल है, जिसमें बुजुर्ग की मर्जी पर हो कि वह काम करे या नहीं। बुजुर्गों को एक अच्छी ज़िंदगी देने के लिए पर्याप्त पेंशन मिलना जरूरी हैं। ‘काम करें या न करें’, यह विकल्प  सभी को मिलना चाहिए, उन्हें भी जो नौकरी से रिटायर नहीं होते।

साभार: इंडियास्पेंड