अखबार के मामले में फंसे सोनिया और राहुल

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(फोटो साभार - विकीपीडिया)
(फोटो साभार – विकीपीडिया)

नेशनल हेराल्ड अखबार मामले में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया और उनके बेटे राहुल गांधी फंस गए हैं। हालांकि दोनों का कहना है कि यह मामला उछालकर मौजूदा केंद्र सरकार बदले की राजनीति कर रही है। अगर इस मामले में सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें कम से कम दस साल की सज़ा होगी।

क्या है मामला
.नेशनल हेरल्ड अखबार की स्थापना 1938 में जवाहरलाल नेहरू ने की थी। अखबार का मालिकाना हक एसोसिएटेड जर्नल लिमिटेड यानी एजेएल के पास था जो दो और अखबार भी छापा करती थी। हिंदी में नवजीवन और उर्दू में कौमी आवाज़।
. कांग्रेस नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने पहले पार्टी फंड से अखबार नेशनल हेराल्ड को नब्बे करोड़ रुपए का लोन दिया। बाद में उसकी कीमती प्रॉपर्टी हड़पने के मकसद से उसे महज़ पचास लाख रुपए में खरीद लिया।
. मामले में भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सोनिया, राहुल के खिलाफ टैक्स चोरी और धोखाधड़ी की याचिका दायर की।
. सोनिया, राहुल को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने 7 दिसंबर को पेशी से छूट दे दी। अब दोनों से 19 दिसंबर को पेश होने को कहा गया है।
कांग्रेस पर धोखाधड़ी का आरोप
भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने वर्ष 2012 में याचिका दायर कर कहा कि यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने सिर्फ पचास लाख रुपयों में सवा नब्बे करोड़ रुपए वसूलने का उपाय किया। उन्होंने टैक्स चोरी और धोखाधड़ी का आरोप कांग्रेस पर लगाया। याचिका में आरोप है कि पचास लाख रुपए में नई कंपनी बनाकर एजेएल की 2000 करोड़ रुपए की संपत्ति को अपना बनाने की चाल चली गई। दिल्ली की अदालत ने चार गवाहों के बयान दर्ज किए और 26 जून 2014 को अदालत ने यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड के सभी निदेशकों को 7 अगस्त 2014 को पेश होने का निर्देश दिया। लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने याचिका दायर कर सम्मन पर रोक लगावा ली।