अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाली 58 वर्षीय बैडमिंटन खिलाड़ी तारावती परमार में अब भी है दम!

साभार: पिक्साबेय

58 साल की तारावती परमार को बैडमिंटन की दुनिया में ऊंचाइयों को छूने से उनकी उम्र नहीं रोक पायी। यही नहीं, इस उम्र में वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर रही हैं।58 साल की तारावती परमार को बैडमिंटन की दुनिया में ऊंचाइयों को छूने से उनकी उम्र नहीं रोक पायी। यही नहीं, इस उम्र में वह अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व भी कर रही हैं। 1959 में एक दलित परिवार में जन्मी तारावती आठ बच्चों में से एक हैं। उनकी माँ मणिबेन परमार और पिता रामजी उनकी सबसे बड़ी ताकत रहे हैं। वह बताती हैं, ‘मेरे पिता साधारण काम करने वाले मजदूर थे जो 10 लोगों का परिवार चला रहे थे। हम एक कच्चे घर में खासिपुर में रहते थे। मेरे पिता ने मुझे मेरी बात कहने और अपनी पंसद से काम करने की पूरी आज़ादी दी थी।’ ताराबेन का खेल से परिचय 1982 में अहमदाबाद में हुआ जब उनकी पोस्ट ऑफिस में डाक सहायक के रूप में नौकरी लगी। विदेशी डाकघर में काम करने के दौरान पहली बार उन्होंने 26 साल की उम्र में बैडमिंटन खेला था। इसके बाद उनका पहला राष्ट्रीय टूर्नामेंट 1987 में दिल्ली में अखिल भारतीय अंतःविषय बैडमिंटन मीट के दौरान हुआ था। इस तरह तारावती अपने विभाग के लिए खेलती हुई आगे बढ़ती गई और पदक लाती रही। लेकिन वह भारत के लिए खेलना चाहती थी और जब उन्होंने 1987 में भारत के लिए खेल कर पदक जीता तो उनके पिता ने ख़ुशी में मिठाई बांटी थी। उनके पिता की 1996 में मृत्यु के बाद ताराबेन थोड़ा चूक गई। लेकिन पिता का सपना पूरा करना था इसलिए उन्होंने अपने आप को सम्भाला और स्वीडन बैडमिंटन प्रतियोगिता के लिए गई। हाल ही में तारावती ने जून में राजकोट में ओपन स्टेट बैडमिंटन रैंकिंग टूर्नामेंट में 35+ महिलाओं की डबल्स स्पर्धा में भाग लेकर स्वर्ण पदक जीता था। वह अपने समुदाय के लिए आज एक प्रेरणा और सम्मान का प्रतिक हैं और आज भी दो घंटे बैडमिंटन का अभ्यास करती हैं। उनका कहना है कि उम्र सिर्फ संख्या भर है। और उनके लिए उनका जीवन खेल को समर्पित है।