• Khabar Lahariya is sold across 600 villages of Uttar Pradesh and Bihar

    Khabar Lahariya is an eight-page weekly local language newspaper brought out by a collective of 40 rural women journalists. Each week, 6,000 copies of Khabar Lahariya are sold across 600 villages of Uttar Pradesh and Bihar, reaching a readership of 80,000  

    Khabar Lahariya is sold across 600 villages of Uttar Pradesh and Bihar
  • 80,000 पाठकों के बीच पढ़े जाने वाले इस अखबार की 6,000 प्रतियाँ छपती हैं

    खबर लहरिया स्थानीय भाषाओं में निकलने वाला आठ पन्नों का साप्ताहिक अखबार है। चालीस महिला पत्रकारों के एकजुट प्रयास से निकाले जाने वाला यह अखबार 600 गाँव तक पहुंचता है । उत्तरप्रदेश और  बिहार में 80,000 पाठकों के बीच पढ़े जाने वाले इस अखबार की 6,000 प्रतिया छपती हैं।

    80,000 पाठकों के बीच पढ़े जाने वाले इस अखबार की 6,000 प्रतियाँ छपती हैं
  • Khabar Lahariya began as the only Bundeli newspaper in India

    Khabar Lahariya began as the only Bundeli newspaper in India and now has editions in Bhojpuri, Awadhi, Hindustani and Bajjika. It connects with its rural audiences through its unique local language content that mainstream media rarely covers.

    Khabar Lahariya began as the only Bundeli newspaper in India
  • बुन्देली के बाद अब बज्जिका, भोजपुरी, अवधी और हिन्दुस्तानी में भी

    बुन्देली में शुरू होकर अब यह बज्जिका,भोजपुरी, अवधी और हिन्दुस्तानी में भी प्रकाशित हो रहा है। मुख्यधारा के अखबारों से अलग खबर लहरिया की स्थानिय भाषा इसे अपने पाठकों से जोडती है। इसमें उन खबरों को जगह मिलती है, जिन्हें मुख्यधारा के अखबारों में बहुत कम जगह मिलती है।

    बुन्देली के बाद अब बज्जिका, भोजपुरी, अवधी और हिन्दुस्तानी में भी
  • Khabar Lahariya has its roots in Bundelkhand

    Khabar Lahariya has its roots in Bundelkhand, a region ridden with poverty, low literacy, skewed sex ratio, high gender and caste-based violence and poor health, education and employment. In these areas, Khabar Lahariya is a space for women journalists in a context where there are none.  

    Khabar Lahariya has its roots in Bundelkhand
  • खबर लहरिया की जड़ें बुंदेलखंड में

    खबर लहरिया की जड़ें बुंदेलखंड में हैं। यह ऐसा इलाका है जहां के लोग न्यूनतम साक्षरता दर, न्यूनतम लिंग अनुपात, लिंग और जाति आधारित हिंसा, बदतर स्वास्थ्य व्यवस्था और बेरोजगारी से जूझ रहे हैं । औरतों की स्थिति के लिहाज से बहुत निचले पायेदान पर स्थित इस  इलाके में महिलाओं को बतौर पत्रकार के रूप में पहचान दिलाने का काम […]

    खबर लहरिया की जड़ें बुंदेलखंड में
  • Unseen places and unheard voices are brought into the sphere of journalism

    Unseen places and unheard voices are what Khabar Lahariya brings into the sphere of journalism. Khabar Lahariya empowers poor rural populations to access news and information, rights and resources, and plays the role of a media watchdog.  

    Unseen places and unheard voices are brought into the sphere of journalism
  • दूरदराज के इलाकों की ख़बरों और दबी हुई आवाज़ों को जगह

    खबर लहरिया दूरदराज के इलाकों की ख़बरों और दबी हुई आवाज़ों को जगह देता है। गरीब ग्रामीण आबादी तक खबरें और सूचना पहुँचाने से लेकर संसाधनों  के इस्तेमाल के अधिकारों के बारे में जागरूकता पैदा करता है। इतना ही नहीं यह मीडिया पर निगरानी का काम भी करता है।  

    दूरदराज के इलाकों की ख़बरों और दबी हुई आवाज़ों को जगह
  • Khabar Lahariya’s journalists come from marginalized communities

    Khabar Lahariya’s journalists come from marginalized communities – in terms of their caste, religion and ethnicity. Many are women who have had little or no access to formal education. Khabar Lahariya was conceptualized by a Delhi-based NGO, Nirantar, a centre for gender and education.

    Khabar Lahariya’s journalists come from marginalized communities
  • खबर लहरिया के सभी पत्रकार जाति, धर्म से अल्पसंख्यक समुदाय से

    खबर लहरिया में काम करने वाले सभी पत्रकार जाति और धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। इनमें से अधिकतर महिलाओं ने औपचारिक  शिक्षा नहीं ली है, अगर कुछ ने पढाई की भी है तो बहुत कम। खबर लहरिया की संकल्पना दिल्ली में मौजूद एक निरंतर संस्था ने की है। यह जेंडर और शिक्षा के मुद्दों पर काम करने […]

    खबर लहरिया के सभी पत्रकार जाति, धर्म से अल्पसंख्यक समुदाय से

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सूखा घोषित होय

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जिला महोबा, ब्लाक कबरई, गांव ग्योड़ी। एते की दलित ओरत भागवती को कहब...

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मुज़फ्फरनगर दंगे में पैंतालिस दिन में हो पूरी जांच

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मुज़फ्फरनगर। मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक आलोक शर्मा ने मुज़फ्फरनगर...

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किन्नरों के खिलाफ हिंसा पर सख्ती जरूरी

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